दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर दिल्ली पुलिस की ओर से अत्यधिक बल प्रयोग के मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की मांग को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किए जाने संबंधी खबरों का चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने खंडन किया है। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई याचिका दाखिल ही नहीं की गई थी और अदालत को केवल एक वकील का प्रतिनिधित्व (रिप्रेजेंटेशन) प्राप्त हुआ था। CJI सूर्यकांत ने यह टिप्पणी उस दौरान की, जब वे तीन जजों की पीठ के साथ वकील द्वारा शुक्रवार सुबह तत्काल सुनवाई के लिए लाए गए जरूरी मामलों को देख रहे थे।
दरअसल, जब वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम एक अन्य मामले को सूचीबद्ध करने का अनुरोध कर रहे थे, उसी दौरान चीफ जस्टिस ने कहा, ‘पिछले दो दिनों में पूरी तरह झूठा दावा किया गया कि एक मामला दाखिल किया गया है। मीडिया ने भी पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना तरीके से यह गलत खबर चलाई कि मुख्य न्यायाधीश ने मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया।’
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘आज सुबह 10 बजे तक मैंने पता करने की कोशिश की, कोई केस दाखिल नहीं हुआ था। सुप्रीम कोर्ट में एक भी पन्ना दाखिल नहीं किया गया। केवल एक प्रतिनिधित्व था। मैं उस प्रतिनिधित्व को रिट याचिका कैसे मान सकता हूं? लेकिन लोग लापरवाही से इसे रिपोर्ट करने लगते हैं।’
क्या हुआ था सुप्रीम कोर्ट में?
सीजेआई सूर्यकांत बुधवार की उस घटना का जिक्र कर रहे थे, जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को उठाने की एक वकील की कोशिश पर विचार करने से इनकार कर दिया था। संबंधित वकील ने केवल एक पत्र भेजा था, कोई याचिका दाखिल नहीं की थी।
इसे देखते हुए चीफ जस्टिस ने उनसे कहा था, ‘हमारा और अपना समय बर्बाद मत कीजिए। आपका समय हमारे समय से ज्यादा मूल्यवान है।’
हालांकि, वकील अपनी बात पर अड़े रहे। जब जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की सदस्यता वाली पीठ ने उन्हें आगे सुनने की इच्छा नहीं जताई, तो वकील ने कहा कि उनके पास कई वीडियो हैं, जिन्हें वह अदालत की अनुमति मिलने पर दिखाना चाहते हैं।
इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, ‘हमें वीडियो में कोई रुचि नहीं है। हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है।’
बहरहाल, चीफ जस्टिस की ओर से ताजा टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं, जब जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है। कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन इसी सप्ताह उस समय हिंसक भी हो गया, जब पुलिस ने संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को रोक दिया और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस सहित लाठियों का इस्तेमाल किया।
झड़पों के बाद कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने हिंसा और झड़पों के संबंध में कई एफआईआर भी दर्ज की हैं।
सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन
दूसरी ओर 26 दिनों तक अनशन पर रहे सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के हाथों जूस पीते हुए अपना अनशन तोड़ दिया। हालांकि सीजेपी का कहना है कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं, आंदोलन जारी रहेगा।
वांगचुक ने एक वीडियो भी जारी किया और बताया कि सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों से उन्हें भरोसा मिला है कि देश की खराब होती परीक्षा प्रणाली और उससे जुड़ी जवाबदेही के मुद्दे पर संसद में चर्चा होगी। सोनम वांगचुक ने साथ ही कहा कि सरकार ने हालिया नीट पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने और शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं करने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार से मिले लिखित आश्वासनों के बाद उन्होंने अनशन खत्म किया।
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