लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दे दी। इस फैसले के बाद लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। इसके साथ ही शिवसेना अब मौजूदा एनडीए सरकार में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के बाद भाजपा की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बन गई है।
लोकसभा सचिवालय के टेबल ऑफिस की ओर से जारी सर्कुलर में 18वीं लोकसभा में ‘छह शिवसेना (यूबीटी) सांसदों की पार्टी संबद्धता में बदलाव’ के बाद संशोधित दलगत स्थिति जारी की गई है।
छह बागी सांसदों में ओमप्रकाश भूपालसिंह उर्फ ओमराजे निंबालकर (धाराशिव/उस्मानाबाद), नागेश बापुराव पाटिल आष्टीकर (हिंगोली), संजय हरिभाऊ जाधव (परभणी), संजय उत्तमराव देशमुख (यवतमाल-वाशिम), भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे (शिरडी) और संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व) शामिल हैं।
शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के विलय को ऐसे समय मंजूरी मिली है, जब केंद्र सरकार 131वें संविधान संशोधन विधेयक के जरिए महिलाओं को आरक्षण देने वाले कानून को लागू करने और परिसीमन विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश में है।
शिवसेना (यूबीटी) की तीखी प्रतिक्रिया
एकनाथ शिंदे की शिवसेना में 6 यूबीटी सांसदों के विलय पर शिवसेना यूबीटी के प्रवक्ता आनंद दुबे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। दुबे ने कहा कि 2022 में जब हमारी पार्टी को तोड़ा जा रहा था, तब से हम लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन, तब से आज तक हमें यह पता नहीं चल पाया कि हमारी गलती क्या है? हमारी पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह चुरा लिया गया है। इसमें तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कितनी बड़ी भूमिका निभाई, वो जगजाहिर है। अब 2026 में एक बार फिर हमारी पार्टी को तोड़ दिया गया। हमारे छह सांसद चुरा लिए गए। इसमें लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बड़ी भूमिका निभाई है।
उन्होंने आगे कहा कि हम कोर्ट जाते हैं तो समय लगता है, तारीख पर तारीख मिलती है। इस बार हमारे जो सांसद चुराए गए, उन्हें एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना का सांसद बताया जा रहा है, जबकि वो हमारे नाम और हमारे चुनाव चिन्ह पर चुनकर आए। ऐसे में लोकसभा स्पीकर ने दोनों पक्षों को सुने बिना अपना फैसला दे दिया। यह दिखाता है कि लोकतंत्र कमजोर होता जा रहा है।
बहरहाल, इस उथल-पुथल के बाद लोकसभा में शिवसेना यूबीटी की संख्या 9 से घटकर 3 हो गई है, जबकि शिंदे गुट की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई है। उद्धव ठाकरे के खेमे में अरविंद सावंत (मुंबई दक्षिण), अनिल देसाई (मुंबई दक्षिण मध्य) और राजभाऊ वाजे (नासिक) बचे हैं।
टीएमसी के बागी सांसदों पर अभी फैसला नहीं
इस बीच तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय को अभी तक मान्यता नहीं मिली है। शनिवार को जारी लिस्ट में लोकसभा में अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस में अब भी 28 सांसद दर्ज हैं। वैसे, सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी के बागी सांसदों के मामले में लोकसभा अध्यक्ष का फैसला रविवार को आ सकता है। वैसे, बागी 20 सांसदों को अलग बैठने की अनुमति मिल गई है।
बताते चलें कि मानसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई (सोमवार) से होने जा रही है। बदले राजनीतिक समीकरण के बीच जहां सरकार की कोशिश कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कहाने की होगी, वहीं दूसरी ओर विपक्ष सरकार को नीट पेपर लीक, अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद, महंगाई और अन्य मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है।
(समाचार एजेंसी IANS के इनपुट के साथ)
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