Homeमनोरंजनराजपाल यादव को दिल्ली हाई कोर्ट से लगा झटका, चेक बाउंस मामले...

राजपाल यादव को दिल्ली हाई कोर्ट से लगा झटका, चेक बाउंस मामले में तीन महीने की जेल

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान यादव को हर मामले में ₹1.05 करोड़ चुकाने का भी आदेश दिया। इस तरह चेक बाउंस के सातों मामलों में कुल जुर्माना 7.35 करोड़ रुपये बनता है।

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार (10 जुलाई) को अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में तीन महीने की सजा सुनाई। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने M/s मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से यादव के खिलाफ दायर सात मामलों में यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने उन्हें सातों मामलों में से हर एक में तीन महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई लेकिन साथ ही यह भी कहा कि ये सजाएं एक साथ चलेंगी।

राजपाल यादव को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका

अदालत ने शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान यादव को हर मामले में ₹1.05 करोड़ चुकाने का भी आदेश दिया। इस तरह चेक बाउंस के सातों मामलों में कुल जुर्माना 7.35 करोड़ रुपये बनता है।

अदालत के आदेश के मुताबिक, प्रत्येक मामले में 1 करोड़ 4 लाख 75 हजार रुपए शिकायतकर्ता को दिए जाएंगे जबकि 25 हजार रुपए राज्य को जमा कराए जाएंगे। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि राजपाल यादव यदि इस फैसले को चुनौती देना चाहते हैं, तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए दो महीने का समय दिया जाता है।

अदालत ने उनकी पत्नी, राधा राजपाल यादव को हर मामले में ₹5 लाख से ज्यादा का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया।

जस्टिस शर्मा ने कहा कि यादव को अपना वादा पूरा करने और कंपनी का कर्ज़ चुकाने के कई मौके दिए गए, लेकिन वह ऐसा करने में नाकाम रहे।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि “ समझौते का पालन करने के लिए कई मौके दिए गए थे। उन्होंने (यादव) और उनके वकील ने कई बयान दिए और भरोसा दिलाया लेकिन बार-बार मौके और भरोसे के बावजूद वे अपने वादों को पूरा करने में नाकाम रहे। ”

जस्टिस शर्मा ने कहा कि वे यादव को ऊपरी अदालत में इस आदेश को चुनौती देने के लिए दो महीने का समय दे रही हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला अभिनेता की फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण से जुड़ा है। साल 2010 में इस फिल्म के लिए राजपाल यादव ने मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी और तय समय पर कर्ज की रकम वापस नहीं की जा सकी। बाद में भुगतान के लिए जारी किए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद कंपनी ने उनके और उनकी पत्नी के खिलाफ सात अलग-अलग मामले दर्ज कराए।

गौरतलब है कि मई 2024 में एक सेशंस कोर्ट ने चेक बाउंस के मामले में उन्हें दोषी ठहराया था और छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी। बाद में हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट ने उनके वकील के इस भरोसे के बाद उनकी सजा पर रोक लगा दी कि विवाद सुलझा लिया जाएगा। मामले को दिल्ली हाई कोर्ट मीडिएशन सेंटर भी भेजा गया था।

हालांकि, बाद में कोर्ट ने पाया कि बार-बार भरोसा दिलाने और समझौता करने के लिए कई बार सुनवाई टलवाने के बावजूद, एक्टर वादा किया गया पेमेंट करने में नाकाम रहे।

दिल्ली हाई कोर्ट ने गौर किया कि यादव ने वे रकम जमा नहीं की थीं जिन्हें चुकाने का भरोसा उन्होंने कोर्ट को दिया था। इनमें ₹2.5 करोड़ की वह रकम भी शामिल थी जिसे किश्तों में चुकाने की इजाजत उन्होंने मांगी थी।

इससे पहले फरवरी 2026 में हाई कोर्ट ने यादव को आदेश दिया कि वे जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर करें क्योंकि वे कोर्ट के पिछले आदेशों का पालन करने में नाकाम रहे थे। सरेंडर करने के लिए और समय मांगने की उनकी बाद की अर्जी भी खारिज कर दी गई।

आखिरकार 5 फरवरी को यादव ने सरेंडर कर दिया और जेल में रहे। बाद में, शिकायतकर्ता के पास ₹1.5 करोड़ जमा करने पर हाई कोर्ट ने उन्हें सजा पर अंतरिम रोक दे दी।

हालांकि, कई बार वादा करने के बावजूद बाकी रकम जमा न कर पाने के कारण, कोर्ट ने उन्हें 3 महीने की जेल की सजा सुनाई।

(समाचार एजेंसी आईएएनएस से इनपुट्स के साथ)

author avatar
अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
amrendra
अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular