अयोध्याः श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के दान में कथित गड़बड़ी और धन के गबन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को कहा कि मामले में कुछ दिन बाद सुनवाई होने से आसमान नहीं टूट पड़ेगा। अदालत ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि अगर वे तत्काल सुनवाई चाहते हैं तो पहले रजिस्ट्री को इसकी जरूरत से संतुष्ट करें।
जस्टिस एम.एम. सुंदरश और जस्टिस शील नागू की अवकाशकालीन पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की, जब याचिकाकर्ता और अधिवक्ता अजय कुमार राय ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि जांच जारी है और इसमें जल्द हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
पीठ ने इसपर कहा कि “आसमान नहीं टूट पड़ेगा… आखिर इतनी तत्काल सुनवाई की क्या जरूरत है?” अदालत ने संकेत दिया कि नियमित पीठों के कामकाज शुरू होने के बाद मामले को सूचीबद्ध किया जा सकता है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, इस याचिका पर 24 जुलाई को सुनवाई होने की संभावना है।
क्या है याचिका की मांग?
अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की ओर से दायर याचिका में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दान राशि के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं की जांच सीबीआई की अगुवाई वाली बहु-विषयक विशेष जांच टीम (एसआईटी) से कराने की मांग की गई है।
याचिका में इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के साथ-साथ निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने का अनुरोध किया गया है। साथ ही केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को दान राशि के प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी निगरानी, नियामक और ऑडिट व्यवस्था विकसित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अगर दान राशि में गड़बड़ी की खबरें सही हैं तो इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित होती है और यदि गलत हैं तो भी स्वतंत्र जांच से सच्चाई सामने आनी चाहिए।
यूपी सरकार की SIT पर क्यों उठे सवाल?
याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 13 जून को गठित एसआईटी की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि प्रशासनिक अधिकारियों की टीम जटिल वित्तीय और आपराधिक मामलों की जांच में उतनी सक्षम नहीं मानी जाएगी, जितनी किसी केंद्रीय एजेंसी या विशेषज्ञ जांच दल की जांच होती है। उनका कहना है कि बिना एफआईआर दर्ज किए एसआईटी ने जांच शुरू कर दी है, जिससे जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को एसआईटी गठित की थी। इसमें लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजीपी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है।
आरोपियों के घरों पर छापेमारी, चंपत राय से पूछताछ की तैयारी
इस बीच उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। रविवार को पुलिस ने मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों के घरों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। जांच एजेंसियां अब कथित गबन की रकम का पूरा हिसाब, उससे खरीदी गई चल-अचल संपत्तियों और रिश्तेदारों या सहयोगियों के जरिए धन के इस्तेमाल की जांच कर रही हैं।
पुलिस के अनुसार, 25 जून को दर्ज एफआईआर के बाद 26 जून को आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान सात आरोपियों के पास से 79.80 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं।
दान राशि में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 27 जून जानकारी दी कि उसके महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने इस्तीफे सौंप दिए हैं। हालांकि इन इस्तीफों पर अंतिम निर्णय को लेकर ट्रस्ट की ओर से विस्तृत जानकारी नहीं दी गई।
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश पुलिस अब चंपत राय, अनिल मिश्रा और ट्रस्ट से जुड़े गोपाल राव से पूछताछ की तैयारी कर रही है। पुलिस का मानना है कि ट्रस्ट के प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज से जुड़े होने के कारण इन तीनों के पास मामले से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य हो सकते हैं। इनके अलावा पुलिस चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों, नकदी बैंक तक पहुंचाने वाले लोगों, बैंक अधिकारियों, सुरक्षा कर्मियों और ट्रस्ट से जुड़े अन्य व्यक्तियों से भी पूछताछ करेगी। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने भी जांच में सहयोग की पुष्टि करते हुए कहा है कि विशेष जांच दल द्वारा मांगी गई सभी आवश्यक जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
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