नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़ते तनाव के बीच शनिवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे कतर के एक तेल टैंकर पर एक प्रोजेक्टाइल से हमला किए जाने की खबरें सामने आई हैं। इस घटना के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में से एक माने जाने वाले इस समुद्री रास्ते पर सुरक्षा के खतरे को लेकर सवाल फिर खड़ा हो गया है।
यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह पहले हुए अंतरिम शांति समझौते के बाद शुक्रवार को फिर से सैन्य कार्रवाई की। अब दोनों देश एक-दूसरे पर युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। इन घटनाओं के बीच लेबनान में भी इजराइल द्वारा हमले किए जाने की खबरें आई हैं।
टैंकर को हमले में पहुंचा नुकसान, क्रू सुरक्षित
ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने बताया कि होर्मुज से गुजरते समय तेल टैंकर पर एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया। एजेंसी के अनुसार, हमले में जहाज के ब्रिज (नियंत्रण कक्ष) को नुकसान पहुंचा, लेकिन चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं। साथ ही समुद्र में किसी तरह के तेल रिसाव या पर्यावरण प्रदूषण की सूचना नहीं मिली है।
घटना के बाद नौसैनिक बलों और वाणिज्यिक जहाजों के बीच समन्वय करने वाले जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर (JMIC) ने क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा खतरे का स्तर बढ़ाकर ‘सब्स्टैंशियल’ कर दिया है।
शनिवार की घटना इस सप्ताह होर्मुज में किसी कमर्शियल जहाज पर दूसरा हमला है। रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज M/V एवर लवली (M/V Ever Lovely) पर भी इसी समुद्री मार्ग में हमला हुआ था। इसके बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के ड्रोन स्टोरेज ठिकानों और तटीय रडार केंद्रों पर हवाई हमले किए थे।
अमेरिकी अटैक के बाद ईरान का बहरीन पर हमला
रिपोर्ट के अनुसार शनिवार को ईरान ने भी बहरीन को निशाना बनाते हुए ड्रोन हमला किया। खबरों के अनुसार यह हमला अमेरिका द्वारा ईरानी सैन्य ठिकानों पर की गई जवाबी कार्रवाई के कुछ घंटे बाद हुआ। अमेरिका ने दावा किया था कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक जहाज पर ईरानी ड्रोन हमले के जवाब में यह कार्रवाई की थी।
अमेरिका का करीबी सहयोगी और अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय की मेजबानी करने वाले बहरीन ने इस हमले की कड़ी निंदा की। बहरीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि कई ईरानी ड्रोन ने देश को निशाना बनाया। बहरीन ने इसे नागरिकों तथा निवासियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। हालांकि, हमले में किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की तत्काल कोई सूचना नहीं मिली है।
वहीं ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उन्होंने क्षेत्र में मौजूद ‘अमेरिकी आतंकी सेना’ से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि किन देशों या सैन्य ठिकानों पर हमला किया गया।
अमेरिका और ईरान के एक-दूसरे पर आरोप
हालिया हिंसा उस अंतरिम समझौते के बाद शुरू हुई है, जिसका उद्देश्य पिछले चार महीने से जारी संघर्ष को रोकना था। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने कमर्शियल जहाजों पर हमला किया, जिसके बाद उसने ईरानी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की। वहीं ईरान का कहना है कि उसकी कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई और अमेरिका लेबनान में युद्धविराम बनाए रखने सहित समझौते के अपने दूसरे वादों को पूरा करने में विफल रहा है।
ईरानी सरकारी टीवी ने दावा किया कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने उन जहाजों पर ‘चेतावनी देते हुए गोलियांट चलाईं, जो ईरान द्वारा स्वीकृत समुद्री मार्गों के बजाय अन्य शिपिंग लेन का इस्तेमाल कर रहे थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अब कुछ जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने से पहले ईरान की अनुमति लेने लगे हैं।
इस बीच ईरान ने ये भी दोहराया है कि जहाज पश्चिमी नौसैनिक बलों द्वारा सुझाए गए वैकल्पिक मार्गों की बजाय ईरान के नियंत्रण वाले निर्धारित समुद्री रास्तों का इस्तेमाल करें। रिपोर्ट के अनुसार, इस सप्ताह कुछ जहाज रेडियो पर चेतावनी मिलने के बाद वापस लौट गए थे।
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के अध्यक्ष इब्राहिम अजीजी ने चेतावनी दी कि जो भी जहाज तेहरान के निर्देशों का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जाएगी। वहीं अमेरिका ने जहाजों को ओमान के पास दक्षिणी समुद्री गलियारे का इस्तेमाल करने की सलाह दी है, जबकि ईरान उत्तरी मार्गों से जहाजों की आवाजाही नियंत्रित करना चाहता है और भविष्य में इन मार्गों पर ट्रांजिट शुल्क लगाने का भी संकेत उसने दिया है।
तेल बाजार की बढ़ी चिंता
इस बढ़ते तनाव के बीच तेल बाजार की भी चिंता बढ़ने लगी है। हाल में अंतरिम शांति समझौते के बाद जहाजों की आवाजाही में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन स्थिति कभी भी ज्यादा बिगड़ने की भी आशंका है। सुरक्षा कारणों से कई तेल टैंकर अपने ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके यात्रा कर रहे हैं। पिछले सप्ताह तेल की कीमतों में गिरावट आई थी क्योंकि इस मार्ग से निर्यात फिर शुरू हो गया था, लेकिन ताजा हमलों ने चिंता एक बार फिर बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि सोमवार को जब बाजार खुलेंगे तो इन घटनाओं का असर तेल बाजार पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।

