पटनाः बिहार के भोजपुर जिले में हुए चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एक अहम खुलासा सामने आया है। समाचार एजेंसी आईएएनएस के पास उपलब्ध पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, भरत तिवारी के शरीर में कुल पांच गोलियां लगी थीं। इस खुलासे के बाद पहले से विवादों में घिरे इस एनकाउंटर को लेकर एक बार फिर सवाल तेज हो गए हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, पहली गोली बाईं जांघ के ऊपरी हिस्से में सामने की ओर से लगी थी। दूसरी गोली बाईं जांघ के मध्य हिस्से के अंदरूनी भाग में मिली। तीसरी गोली दाहिनी जांघ के मध्य भाग के अंदरूनी हिस्से में लगी थी, जबकि चौथी गोली दाहिनी जांघ के बाहरी हिस्से से अंदर की ओर प्रवेश करती पाई गई। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि पांचवीं गोली बाएं पैर के मध्य भाग में पीछे की ओर लगी थी।
चश्मदीदों के दावों से उठे नए सवाल
उधर, दैनिक भास्कर की पड़ताल में भरत तिवारी के करीबी दोस्त राजू और भाई पप्पू ने दावा किया है कि 17 जून को सुबह करीब 9:32 बजे पुलिस कार्रवाई के दौरान वे घटनास्थल से लगभग 20 मीटर की दूरी पर मौजूद थे। दोनों ने रिपोर्टरों के साथ घटनास्थल पर जाकर पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण (रीक्रिएशन) भी किया।
भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, चश्मदीदों का दावा है कि पुलिस ने पहले आसपास का इलाका खाली करा दिया था ताकि कोई वीडियो न बना सके। उनके अनुसार, भरत ने पुलिस के कहने पर अपनी पिस्टल फेंक दी थी। इसके बाद एक पुलिसकर्मी ने उसे उठा लिया और तभी गोलीबारी हुई।
भरत के भाई पप्पू का दावा है कि पुलिसकर्मियों ने पहले भरत को अपने साथ चलने के लिए कहा। उनके मुताबिक, कुछ कदम आगे बढ़ने के बाद उसे धक्का देकर जमीन पर गिराया गया और करीब 30 सेकेंड के भीतर तीन गोलियां मार दी गईं। पप्पू का यह भी दावा है कि पहली गोली लगने के बाद भरत ने कहा था, “धोखा देकर गोली मार दी।” इसके बाद पुलिस उसे अपने साथ ले गई और वह फिर कभी जीवित नहीं लौटा।
चश्मदीदों ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के दौरान भरत की मां और बहन को घटनास्थल की ओर आने से रोकने के लिए महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन वहां से हटा दिया। उनका कहना है कि पुलिस ने आसपास मौजूद लोगों को भी पीछे हटने के लिए मजबूर किया, लेकिन वे कुछ दूरी से पूरी घटना देखते रहे।
सीएम ने न्यायिक जांच का दिया है आदेश
भरत तिवारी की मौत को लेकर कथित फर्जी मुठभेड़ के आरोपों के बाद बिहार की राजनीति में भी घमासान मचा हुआ है। विपक्ष लगातार इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है तथा सरकार को निशाने पर ले रहा है। इसी बीच राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक जांच कराने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को पटना में आयोजित ‘संविधान हत्या दिवस’ कार्यक्रम में कहा कि भोजपुर की घटना को सरकार ने गंभीरता से लिया है और पूरे मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय न्यायिक आयोग का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हर गंभीर घटना पर त्वरित कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक जवाबदेही का जिक्र करते हुए कहा कि यदि किसी आवेदन पर 30 दिनों के भीतर आदेश जारी नहीं होता है तो 31वें दिन संबंधित अधिकारी के निलंबन की कार्रवाई मुख्यमंत्री कार्यालय से की जाएगी। उनके अनुसार, सरकार की प्राथमिकता लोगों को समयबद्ध न्याय और प्रशासनिक राहत उपलब्ध कराना है।
समाचार एजेंसी आईएएनएस इनपुट के साथ

