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राम मंदिर ट्रस्ट से चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा, चढ़ावा चोरी विवाद के बीच बड़ा अपडेट

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब एक दिन पहले ही इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट जमा होने के बाद कल इस मामले में पहली एफआईआर भी दर्ज हुई थी।

अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गबन के मामले की जांच के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। समाचार एजेंसी IANS ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख चंपत राय और ट्रस्ट के एक अन्य सदस्य अनिल मिश्रा ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब एक दिन पहले ही इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार किए गए लोगों में दान की गिनती करने वाले कर्मचारी, गिनती प्रक्रिया के प्रभारी, पूरी प्रक्रिया की निगरानी करने वाले एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी और राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर और करीबी सहयोगी रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं।

चढ़ावा चोरी मामले में पहली एफआईआर

अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के कथित गबन के मामले में 25 जून (गुरुवार) को पहली एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के जमा करने के बाद दर्ज की गई है।

इससे पहले 14 जून को श्री राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। इस टीम को मंदिर में चढ़ावे के धन में कथित अनियमितताओं की जांच की जिम्मेदारी दी गई थी। एसआईटी ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसके दो दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के कथित गबन से जुड़ा है। ऐसी आशंका है कि दान के पैसों की गिनती और उसके प्रबंधन से जुड़े कुछ लोगों ने श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का एक हिस्सा निजी लाभ के लिए हड़प लिया। आरोपियों के खिलाफ चोरी, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) और आपराधिक साजिश जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

कथित दान घोटाले का मामला कुछ दिन पहले सामने आया था। विपक्ष के आरोपों के बीच बीजेपी के एक नेता ने भी मामले में जांच की मांग के लिए पीएमओ को खत लिखा था। विवाद बढ़ने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने खुद राज्य सरकार से पूरे मामले की जांच कराने का अनुरोध किया। इसके बाद 14 जून को एसआईटी का गठन किया गया।

इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले को लेकर विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि जो लोग पहले राम मंदिर निर्माण का विरोध करते थे, वही अब इस विवाद का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

देवरिया में शुक्रवार को विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार जनता की आस्था से जुड़े मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम करती है।

उन्होंने कहा कि भगवान राम से जुड़े किसी भी विषय पर राजनीति करने वालों को जनता पहचानती है और श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ विश्वासघात करने वाला कोई भी व्यक्ति बख्शा नहीं जाएगा। यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह भी पढ़ें- अयोध्या दान घोटाले पर विपक्ष पर बरसे सीएम योगी, बोले- राम भक्तों की आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, सबूत हैं तो SIT को दें

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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