जेनेवा: अमेरिका और ईरान 19 जून (शुक्रवार) को स्विट्जरलैंड में औपचारिक रूप से एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करेंगे। इससे उनके बीच चल रहे युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़े नए प्रतिबंध लगाने के मकसद से 60 दिनों की बातचीत का रास्ता साफ हो जाएगा।
ब्लूमबर्ग न्यूज के मुताबिक, दोनों देशों के बीच 14 सूत्रों पर सहमति बन सकती है। इन बिंदुओं में लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने की घोषणा के साथ-साथ दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करने का जिक्र है। इसके साथ ही ईरान और अमेरिका 60 दिनों के अंदर किसी अंतिम समझौते पर पहुंच सकते हैं।
इस समझौते के बाद अमेरिका द्वारा होर्मुज पर नाकेबंदी हटाने का भी जिक्र है। इसके अलावा ईरान के पुनर्वास और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की फंडिग सुनिश्चित करेगा।
अमेरिका-ईरान समझौते में किन बातों का जिक्र है?
- इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) मौजूदा युद्ध में अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इस समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding) पर हस्ताक्षर करते ही लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध को तुरंत और हमेशा के लिए खत्म करने की घोषणा करते हैं। वे यह भी वचन देते हैं कि अब से वे एक-दूसरे के खिलाफ कोई भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई नहीं करेंगे और एक-दूसरे के खिलाफ बल प्रयोग करने या बल प्रयोग की धमकी देने से बचेंगे। अंतिम समझौता इस अनुच्छेद और बाकी अनुच्छेदों की शर्तों की पुष्टि करेगा।
- इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल न देने का संकल्प लेते हैं।
- इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका ज्यादा से ज्यादा 60 दिनों के भीतर बातचीत करके किसी अंतिम समझौते पर पहुंचने का संकल्प लेते हैं। आपसी सहमति से इस समय-सीमा को बढ़ाया जा सकता है।
- इस सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर होते ही, संयुक्त राज्य अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी हटा लेगा और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के दखल या रुकावट को रोकेगा और ज्यादा से ज्यादा 30 दिनों के भीतर आवाजाही को उसकी पूरी क्षमता पर बहाल कर देगा। जहाजों की आवाजाही इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की ओर से युद्ध-पूर्व आवाजाही की मात्रा के अनुपात में होगी। संयुक्त राज्य अमेरिका अंतिम समझौते के बाद 30 दिनों के भीतर आसपास के इलाकों से अपनी सेना हटाने का भी वचन देता है।
- इस सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर करने के बाद ईरान का इस्लामिक गणराज्य तुरंत ऐसे कदम उठाएगा जिनसे यह सुनिश्चित हो सके कि फारस की खाड़ी से ओमान सागर और ओमान सागर से फारस की खाड़ी के बीच व्यापारिक जहाजों की आवाजाही 30 दिनों के भीतर युद्ध-पूर्व के स्तर पर बहाल हो जाए। इसके लिए ईरान तकनीकी बाधाओं को दूर करने और बारूदी सुरंगों (माइन्स) को बेअसर करने की जरूरत का भी ध्यान रखेगा।
- अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्वास और आर्थिक विकास के लिए दोनों पक्षों की सहमति से एक व्यापक योजना बनाने का काम करेगा और इसके लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की फंडिंग सुनिश्चित करेगा। अंतिम समझौते के हिस्से के तौर पर इस योजना को लागू करने का तरीका 60 दिनों के भीतर तैयार किया जाएगा।
- अमेरिका इस बात का वादा करता है कि वह ईरान पर लगी सभी तरह की पाबंदियों को खत्म करेगा। इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्तावों के साथ-साथ अमेरिका की सभी एकतरफा पाबंदियां (प्राइमरी और सेकेंडरी) शामिल हैं। इन पाबंदियों को हटाने का काम एक तय समय-सारणी के अनुसार किया जाएगा, जिस पर अंतिम समझौते के तहत सहमति बनेगी।
- इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान फिर से कहता है कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान और अमेरिका इस बात पर सहमत हुए हैं कि एनरिच्ड मटीरियल और ईरान की परमाणु जरूरतों समेत परमाणु से जुड़े अन्य सभी आपसी सहमति वाले मुद्दों पर अंतिम समझौते में उचित रूप से बात की जाएगी। अंतिम समझौता इस अनुच्छेद की शर्तों की पुष्टि करेगा।
- इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान और अमेरिका इस बात पर सहमत हैं कि अंतिम समझौते तक वे यथास्थिति बनाए रखेंगे। ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर यथास्थिति बनाए रखेगा और अमेरिका ईरान पर नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा या क्षेत्र में अपनी सेना को मजबूत नहीं करेगा।
- अमेरिका यह वादा करता है कि इस सहमति-पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर होने के तुरंत बाद और प्रतिबंध हटने की तारीख तक, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और उनसे बनी चीजों तथा बैंकिंग, बीमा, परिवहन और इसी तरह की सभी संबंधित सेवाओं के निर्यात के लिए छूट (waivers) जारी करेगा।
- अमेरिका यह वादा करता है कि अंतिम समझौते की दिशा में बातचीत में हुई प्रगति को देखते हुए इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के फ़्रीज किए गए या प्रतिबंधित फंड और संपत्ति को जारी कर दिया जाएगा और पूरी तरह से इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। ये फंड चाहे मास्टर अकाउंट में रखे हों या ट्रांसफर किए गए हों, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के सेंट्रल बैंक द्वारा तय किए गए किसी भी अंतिम लाभार्थी भुगतान के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे और इस्तेमाल के लिए पूरी तरह से उपलब्ध होंगे। अमेरिका इस आधार पर सभी जरूरी परमिट और लाइसेंस जारी करने का वादा करता है।
- इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका इस बात पर सहमत हैं कि अंतिम समझौते के सफल कार्यान्वयन और भविष्य की प्रतिबद्धताओं की देखरेख के लिए एक कार्यान्वयन तंत्र स्थापित किया जाएगा।
- इस समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने और इसके आर्टिकल 4, 5, 10 और 11 को लागू करने की शुरुआत और इन कदमों को लगातार लागू रखने के बारे में भरोसा मिलने के बाद ईरान और अमेरिका सिर्फ बाकी आर्टिकल के लिए एक अंतिम समझौते पर बातचीत शुरू करेंगे।
- ब्लूमबर्ग पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच समझौते के 14वें बिंदु में कहा गया है कि अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक बाध्यकारी प्रस्ताव के जरिए मंजूरी दी जाएगी।
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