नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के दो शीर्ष अधिकारियों का तबादला कर दिया। यह तबादला बोर्ड की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को लेकर चल रहे विवाद के बीच किया गया है। सामने आई जानकारी के अनुसार CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला किया गया है, जबकि ओएसएम प्रणाली को टेंडर संबंधी संबंधी की जांच के लिए एक समिति का भी गठन किया गया है।
कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन (सीबीसी) की अध्यक्ष एस राधा चौहान को जांच समिति का एकमात्र सदस्य नियुक्त किया गया है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर वे अन्य अधिकारियों की भी सहायता ले सकती हैं। जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है, ‘अध्यक्ष को आवश्यकतानुसार अन्य कार्यालयों के अधिकारियों की सहायता लेने का अधिकार है। सीबीसी द्वारा समिति को सचिवालयी सहायता प्रदान की जाएगी।’
इसमें आगे कहा गया है, ‘समिति एक माह के भीतर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।’
CBSE 12वीं के नतीजे आने के बाद से विवाद
दरअसल, पिछले महीने सीबीएसई 12वीं के नतीजे आने के बाद से बोर्ड सवालों के घेरे में है। इस बार पहली बार कॉपियां OSM प्रणाली (कंप्यूटर स्क्रीन पर) से जांची गई थी। हालांकि, रिजल्ट के बाद कई छात्रों ने अपने नंबरों को लेकर शिकायत की। इसके बाद पूरा विवाद सामने आया। ओएसम प्रणाली में दरअसल पहले छात्रों की कॉपी स्कैन की जाती है और एक सुरक्षित सर्वर पर अपलोड होती हैं। इसके बाद एग्जामिनर ऑनलाइन कंप्यूटर पर ही कॉपी चेक करता है और नंबर देता है।
रिजल्ट आने के बाद कई छात्रों ने अपनी कॉपी देखनी चाही और फिर से कॉपियों की चेकिंग की मांग की। जब इन छात्रों को कॉपी मुहैया कराई गई तो कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई। कई कॉपियां ब्लर नजर आ रही थी, तो कई छात्रों की ये भी शिकायत रही कि उनके रिजल्ट के लिए जिस उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन किया गया, वो उनकी थी ही नहीं। कुछ छात्रों का यह भी दावा रहा है कि उत्तर पुस्तिका में लिखे गए उत्तर की तुलना में प्राप्त अंक कम दिखाई दिए।
मार्किंग विवाद के बीच री-इवैल्यूएशन पोर्टल खुला
इस बीच सीबीएसई ने कक्षा 12 के उन छात्रों के लिए अपना ऑनलाइन पोर्टल 6 जून तक खोल दिया है, जो अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं में त्रुटियों के सत्यापन (वेरिफिकेशन) या उत्तरों के पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) के लिए आवेदन करना चाहते हैं। इसे 1 जून से ही खोला जाना था, लेकिन इसमें देरी हुई। बोर्ड ने बताया कि आवेदन प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित बनाने और छात्रों के रिकॉर्ड तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने के लिए ‘आधार-आधारित वेरिफिकेशन’ की सुविधा भी शुरू की गई है।
सीबीएसई की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, पोर्टल 2 जून से सक्रिय हो गया है और 6 जून की मध्यरात्रि तक खुला रहेगा। इस अवधि के दौरान पात्र छात्र अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं में पाई गई समस्याओं के सत्यापन के लिए आवेदन कर सकते हैं। यदि वे मूल्यांकन से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे विशिष्ट प्रश्नों के पुनर्मूल्यांकन का अनुरोध भी कर सकते हैं। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन सुविधाओं का लाभ केवल वही छात्र उठा सकते हैं, जिन्होंने पहले से अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियां प्राप्त कर ली हैं।
कैसे करें आवेदन
नई व्यवस्था के तहत छात्रों को पोर्टल पर पहुंचने के लिए सीबीएसई की वेबसाइट पर अपने खाते के माध्यम से लॉग इन करना होगा और आधार सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। बोर्ड के अनुसार, यह व्यवस्था सुरक्षा और पहचान सत्यापन को मजबूत करने के उद्देश्य से लागू की गई है। जिन छात्रों के पास आधार कार्ड नहीं है, उनके लिए सीबीएसई ने माता-पिता, अभिभावक या किसी करीबी रिश्तेदार के आधार विवरण का उपयोग करने की अनुमति दी है। हालांकि, बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि वेरिफिकेशन के दौरान दर्ज किया गया नाम, जन्म तिथि और लिंग उस व्यक्ति के विवरण से मेल खाना चाहिए, जिसके आधार नंबर का उपयोग किया जा रहा है।
बोर्ड ने इस बात पर जोर दिया है कि पूरी प्रक्रिया (आवेदन जमा करना और शुल्क का भुगतान करना शामिल है) ऑनलाइन है। कोई भी ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा, और निर्धारित समय सीमा के बाद जमा किए गए किसी भी अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा।
स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन के लिए छात्र विभिन्न प्रकार की समस्याओं की रिपोर्ट कर सकते हैं। इनमें पृष्ठों का गायब होना, पूरक (सप्लीमेंट्री) शीट का शामिल न होना, स्कैन का धुंधला होना, नक्शे या ग्राफ का गायब होना, गलत उत्तर पुस्तिका प्राप्त होना या किसी अन्य प्रश्न-पत्र सेट के आधार पर मूल्यांकन किया जाना शामिल है। एक ही आवेदन में एक से अधिक समस्याओं और विषयों को शामिल किया जा सकता है।
बोर्ड की ओर से समस्याओं की जांच (वेरिफिकेशन) के लिए प्रति उत्तर-पुस्तिका 100 रुपये और पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) के लिए प्रति प्रश्न 25 रुपये तय की गई है। पेमेंट यूपीआई, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए किया जा सकता है।
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