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अमेरिका ने ईरान पर फिर किया सैन्य हमला, होर्मुज के पास हमलावर ड्रोनों को मार गिराया

प ने विश्वास जताया कि समझौता जल्द ही हो जाएगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच “काफी हद तक” समझौता हो चुका है। हालांकि बातचीत अभी भी जारी है।

तेहरान: अमेरिकी सैन्य बलों ने बुधवार (27 मई) को ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए। अमेरिकी अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। अमेरिकी केंद्रीय कमान बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास खतरा पैदा कर रहे चार ईरानी एकतरफा हमलावर ड्रोनों को मार गिराया।

अधिकारियों ने बताया कि अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास में स्थित एक ईरानी जमीनी नियंत्रण केंद्र पर भी हमला किया। यह पांचवां ड्रोन लॉन्च करने वाला था।

ट्रंप के बयान के बाद अमेरिका ने किए हमले

अमेरिका की तरफ से ये हमले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बुधवार को दिए गए उस बयान के बाद हुए हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान “मामूली बातचीत” कर रहा है और इस बात पर जोर दिया था कि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव उन्हें लगभग तीन महीने से चल रहे इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए जल्दबाजी में समझौता करने के लिए मजबूर नहीं करेंगे। ईरान-अमेरिका युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में चिंता पैदा कर दी है।

कैबिनेट बैठक की शुरुआत में बोलते हुए ट्रंप ने विश्वास जताया कि समझौता जल्द ही हो जाएगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच “काफी हद तक” समझौता हो चुका है। हालांकि बातचीत अभी भी जारी है।

डोनाल्ड ट्रंप एक ऐसे समझौते की तलाश में हैं जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल जाए और उन्हें यह साबित करने का ठोस आधार मिल सके कि ईरान की परमाणु क्षमता इतनी कम हो गई है कि वे जीत की घोषणा कर सकें जिससे रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से अलोकप्रिय इस संघर्ष का अंत हो सके। लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए ट्रंप को इस बात का भी खतरा है कि उनके चुने हुए युद्ध का अंत संतोषजनक न हो।

रिपब्लिकन पार्टी को करना पड़ रहा संघर्षों का सामना

इस उभरते समझौते से कई अहम मुद्दे टल गए हैं, जिनका समाधान बाद में किया जाना है। इसके चलते रिपब्लिकन पार्टी और राष्ट्रपति ट्रंप को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। यहां तक कि उनके कुछ समर्थकों की ओर से भी आलोचना झेलनी पड़ रही है कि ईरान के कट्टरपंथी नेता इस संघर्ष से कमजोर होकर उभरेंगे लेकिन उनका हौसला और बढ़ेगा। यह सब ऐसे समय में चरम पर पहुंच रहा है जब कांग्रेस पर नियंत्रण तय करने वाले मध्यावधि चुनाव नजदीक आ रहे हैं और रिपब्लिकन इस बात से चिंतित हैं कि बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतें अमेरिकी मतदाताओं के मनोबल को गिरा रही हैं।

ट्रंप ने हालांकि बुधवार को इस बात को खारिज कर दिया कि आगामी चुनाव उनकी ईरान रणनीति को प्रभावित करेंगे। ट्रंप ने कहा कि ” उन्हें लगा कि वे मुझसे ज्यादा देर तक इंतजार कर लेंगे। आप जानते हैं ‘हम उससे ज्यादा देर तक इंतजार करेंगे। उसके पास तो मध्यावधि चुनाव हैं।”

यह भी पढ़ें – ‘ये मनगढ़ंत बातें हैं…’, समझौते को लेकर ईरानी मीडिया के दावों पर भड़का व्हाइट हाउस, रिपोर्ट को बताया झूठा

ट्रंप ने यह स्वीकार किया कि अभी भी बहुत काम करना बाकी है लेकिन उन्होंने इस बात पर पूरा भरोसा जताया कि दोनों पक्ष किसी नतीजे पर पहुंच जाएंगे। ट्रंप ने आगे कहा कि ” वे समझौता करने के लिए बहुत उत्सुक हैं। अभी तक वे उस मुकाम तक नहीं पहुंचे हैं। हम इससे संतुष्ट नहीं हैं लेकिन हम संतुष्ट हो जाएंगे – या तो ऐसा होगा या फिर हमें काम पूरा करना ही होगा। “

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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