देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सोमवार को एक बार फिर बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम 2.61 रुपए प्रति लीटर और डीजल के दाम 2.71 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दिए। इसके साथ ही पिछले 10 दिनों में पेट्रोल की कीमतों में कुल करीब 7.35 रुपए और डीजल में 7.53 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है।
नई दरों के बाद दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपए प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। खास बात यह है कि मई 2022 के बाद पहली बार दिल्ली में पेट्रोल की कीमत फिर से 100 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंची है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के चलते तेल कंपनियां धीरे-धीरे बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल रही हैं।
ब्रेंट क्रूड 28 फरवरी को 72.87 डॉलर प्रति बैरल था, जो मार्च में बढ़कर लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि सोमवार को शुरुआती कारोबार में इसमें गिरावट दर्ज हुई और कीमत 99 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई। माना जा रहा है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज स्ट्रेट से तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीदों के चलते यह नरमी आई है। दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है।
इसके बावजूद तेल कंपनियां लगातार कीमतें बढ़ा रही हैं। उद्योग से जुड़े अधिकारियों और ऊर्जा क्षेत्र के विश्लेषकों का कहना है कि सरकारी तेल कंपनियां केवल मौजूदा घाटे की भरपाई नहीं कर रहीं, बल्कि पुराने नुकसान की भी रिकवरी कर रही हैं।
अभी और बढ़ सकते हैं दाम
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल राहत मिलने की संभावना कम है। तेल कंपनियों के घाटे में कमी जरूर आई है, लेकिन वह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
बताया जा रहा है कि 15 मई को पहली बढ़ोतरी से पहले तीनों सरकारी तेल विपणन कंपनियों को प्रतिदिन करीब 1,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा था। बाद की बढ़ोतरी के बाद यह घटकर 500 करोड़ रुपए से नीचे आ गया है। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि यदि ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे स्थिर नहीं होता, तो आने वाले दिनों में एक और बढ़ोतरी हो सकती है।
क्षेत्र से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के तुरंत बाद कीमतें नहीं बढ़ाई गई थीं, क्योंकि उस दौरान कई राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे थे। इसी वजह से तेल कंपनियों ने कुछ समय तक बढ़ी हुई लागत खुद वहन की।
मुनाफे में तेल कंपनियां, लेकिन जनता पर बोझ
दिलचस्प बात यह है कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों का मुनाफा मजबूत बना हुआ है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में संयुक्त रूप से 19,470 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में करीब 41 प्रतिशत अधिक है।
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में इन कंपनियों का कुल मुनाफा बढ़कर 77,280 करोड़ रुपए से अधिक हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 130 प्रतिशत ज्यादा है।
| शहर | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) | बढ़ोतरी |
|---|
| दिल्ली | 102.12 | 95.20 | पेट्रोल +₹2.61, डीजल +₹2.71 |
| लखनऊ | 101.89 | 95.36 | पेट्रोल +₹2.61, डीजल +₹2.72 |
| कोलकाता | 113.51 | 99.82 | पेट्रोल और डीजल दोनों में बढ़ोतरी |
| मुंबई | 111.21 | 97.83 | पेट्रोल और डीजल दोनों में बढ़ोतरी |
| चेन्नई | 107.77 | 99.55 | पेट्रोल और डीजल दोनों में बढ़ोतरी |
पेट्रोल पंपों पर लोगों में नाराजगी
लगातार बढ़ती कीमतों से आम लोगों में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। दिल्ली के पेट्रोल पंपों पर तेल भरवाने पहुंचे लोगों ने कहा कि महंगाई और कम होती आमदनी के बीच ईंधन की कीमतें अब घरेलू बजट पर भारी पड़ने लगी हैं।
एक व्यक्ति ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “ऐसा लग रहा है कि कीमतें लगातार बढ़ती ही जाएंगी। इस पर नियंत्रण होना चाहिए, नहीं तो आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।”
एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि कामकाज पहले से कम हो गया है, लेकिन पेट्रोल लगातार महंगा हो रहा है। उन्होंने कहा, “हम रोज करीब 300 रुपए का तेल भरवाते हैं। ग्राहक पहले जितना भुगतान नहीं कर पा रहे। ऐसे में मध्यम वर्ग के लिए खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा है।”
वहीं, एक टैक्सी चालक ने कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर परिवहन क्षेत्र पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “किराया बढ़ रहा है, लेकिन कमाई नहीं बढ़ रही। अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में परेशानी और बढ़ेगी।”
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