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दिल्ली जिमखाना क्लब सुर्खियों में क्यों, 113 साल पुराने इस क्लब की क्या है कहानी?

उप-भूमि एवं विकास अधिकारी सुचित गोयल द्वारा जारी इस नोटिस के तहत क्लब की जनरल कमेटी और सेक्रेटरी को निर्देश दिया गया है कि वे 5 जून 2026 तक इस पूरी बेशकीमती जमीन, उस पर बनी ऐतिहासिक इमारतों, ढांचों, लॉन और फिटिंग्स का शांतिपूर्ण कब्जा सरकार को सौंप दें।

दिल्ली का चर्चित दिल्ली जिमखाना क्लब इन दिनों एक बड़े सरकारी आदेश के बाद चर्चा के केंद्र में है। केंद्र सरकार ने क्लब को 5 जून 2026 तक अपनी 27.3 एकड़ जमीन खाली करने का निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि यह इलाका राष्ट्रीय सुरक्षा और डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए जरूरी है।

करीब 113 साल पुराना यह क्लब, देश की सत्ता, नौकरशाही, सेना, राजनीति और बड़े कारोबारी घरानों का सामाजिक केंद्र माना जाता रहा है। यह इलाका प्रधानमंत्री आवास 7 लोक कल्याण मार्ग के ठीक बगल में स्थित है। अब सरकार के इस कदम ने न सिर्फ क्लब के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि इसके औपनिवेशिक इतिहास और एलीट संस्कृति को लेकर भी बहस तेज हो गई है।

आखिर क्या है सरकार का कानूनी आधार?

सरकारी नोटिस में क्लब की मूल लीज डीड के ‘क्लॉज 4’ का हवाला दिया गया है। इसके तहत यदि जमीन सार्वजनिक कार्य या राष्ट्रीय हित के लिए आवश्यक हो, तो सरकार को उस जमीन पर दोबारा कब्जा लेने का अधिकार है।

नोटिस के मुताबिक भारत के राष्ट्रपति ने इसी विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए लीज समाप्त करने और प्रॉपर्टी को तत्काल सरकारी नियंत्रण में लेने का आदेश दिया है। सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा, डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर और शासन व्यवस्था से जुड़ी संस्थागत परियोजनाओं को इसका प्रमुख कारण बताया है।

अगर क्लब तय समयसीमा तक कब्जा नहीं सौंपता, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत जबरन कब्जा भी लिया जा सकता है। इस फैसले के बाद क्लब प्रबंधन कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है, जबकि करीब 600 कर्मचारियों की नौकरी पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

क्लब के सदस्य नीतिन वर्मा ने केंद्र सरकार की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे मनगढ़ंत आधारों पर लिया गया फैसला बताया। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, यह बेहद शर्म की बात है कि आप काल्पनिक और मनगढ़ंत वजहों के आधार पर इस क्लब को बंद करना चाहते हैं। मुझे नहीं लगता कि यहां ऐसा कुछ है, जिस पर कार्रवाई की ज़रूरत हो। इतने वर्षों से यह क्लब अस्तित्व में है और यह दिल्ली की एक प्रमुख पहचान रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि यहां अनुशासन का बेहद सख्ती से पालन होता है। क्लब में आने वाले हर व्यक्ति की पूरी जांच और स्क्रीनिंग की जाती है। अब तो प्रधानमंत्री आवास भी शिफ्ट होने जा रहा है, फिर सुरक्षा को लेकर ऐसा कौन सा खतरा है? आज तक यहां कोई घटना नहीं हुई। मुझे लगता है कि ये सारे तर्क पूरी तरह काल्पनिक हैं।

दिल्ली जिमखाना क्लब की कहानी, किसने किया था डिजाइन?

दिल्ली जिमखाना क्लब का इतिहास ब्रिटिश शासन के दौर से जुड़ा है। इसकी शुरुआत 1911 में हुई उस ऐतिहासिक घोषणा के बाद मानी जाती है, जब ब्रिटिश सम्राट किंग जॉर्ज पंचम ने भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने का फैसला किया था। राजधानी बदलने के साथ बड़ी संख्या में ब्रिटिश अधिकारी और सैन्य अफसर दिल्ली आने लगे, जिनके सामाजिक मेलजोल और खेल गतिविधियों के लिए एक विशेष क्लब की जरूरत महसूस हुई।

इसी के बाद 3 जुलाई 1913 को “इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब” की स्थापना हुई। इसके पहले अध्यक्ष ब्रिटिश भारत के वरिष्ठ प्रशासक सर स्पेंसर हरकोर्ट बटलर बने। आजादी के बाद 15 अगस्त 1947 को इसके नाम से “इम्पीरियल” शब्द हटा दिया गया और यह “दिल्ली जिमखाना क्लब” कहलाने लगा।

क्लब को 1928 में नई दिल्ली में 27.3 एकड़ जमीन स्थायी लीज पर दी गई थी। इसकी मुख्य इमारत का डिजाइन प्रसिद्ध ब्रिटिश वास्तुकार रॉबर्ट टॉर रसेल ने तैयार किया था, जिन्होंने कनॉट प्लेस और तीन मूर्ति भवन जैसी दिल्ली की कई ऐतिहासिक इमारतों को भी डिजाइन किया था। इसका निर्माण उस दौर के चर्चित ठेकेदार सर तेजा सिंह मलिक ने कराया था।

क्यों माना जाता है यह क्लब ‘पावर और प्रतिष्ठा’ का प्रतीक?

दिल्ली जिमखाना क्लब लंबे समय से देश के सबसे एक्सक्लूसिव क्लबों में गिना जाता है। यहां सदस्यता मिलना सामाजिक प्रतिष्ठा और रसूख का प्रतीक माना जाता है।

क्लब में स्थायी सदस्यों की संख्या लगभग 5,600 तक सीमित रखी जाती है। हर साल केवल उन्हीं सीटों को भरा जाता है जो किसी सदस्य के निधन या सदस्यता छोड़ने के बाद खाली होती हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां सदस्यता पाने के लिए लोगों को 30 से 40 साल तक इंतजार करना पड़ता है। निजी श्रेणी के आवेदकों को सिर्फ वेटिंग लिस्ट में जगह सुरक्षित करने के लिए ही करीब 7 लाख रुपये से अधिक फीस जमा करनी पड़ती है।

क्लब का “ग्रीन कार्ड सिस्टम” भी लंबे समय से विवादों में रहा है। आलोचकों का आरोप रहा कि इससे मौजूदा सदस्यों के परिवारों को प्राथमिकता मिलती थी और आम लोगों के लिए सदस्यता लगभग असंभव हो जाती थी।

विवादों से भी रहा पुराना रिश्ता

दिल्ली जिमखाना क्लब पिछले कुछ वर्षों में कई विवादों और जांचों के केंद्र में रहा है। साल 2021 में केंद्र सरकार ने क्लब पर वित्तीय अनियमितताओं, कुप्रबंधन, नियमों के उल्लंघन और पक्षपात के आरोप लगाए थे। इसके बाद कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने क्लब की जनरल कमेटी भंग कर वहां सरकारी प्रशासक नियुक्त किया था।

इसके अलावा पर्यावरण नियमों के उल्लंघन, अवैध बोरवेल और टैक्स बकाया जैसे आरोप भी क्लब पर लगे। 2014 में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने भी कार्रवाई की थी।

क्लब से जुड़े दिलचस्प किस्से

लेडी विलिंगडन और स्विमिंग पूल: 1930 के दशक में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड विलिंगडन की पत्नी लेडी विलिंगडन को तैराकी का बेहद शौक था। निर्माण में देरी से नाराज होकर उन्होंने अपने निजी पैसों से करीब 21,000 रुपये दान देकर क्लब का स्विमिंग पूल जल्दी बनवाया था। आज भी वहां उनके नाम की पट्टिका मौजूद है।

विभाजन की भावुक शाम: 1947 के विभाजन के दौरान ब्रिटिश भारतीय सेना के हिंदू, मुस्लिम और सिख अधिकारी इसी क्लब में इकट्ठा हुए थे। कहा जाता है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान की सेनाओं में बंटने से पहले यहां आखिरी बार साथ बैठकर ड्रिंक साझा की थी।

दुनिया के सबसे बड़े ग्रास टेनिस कोर्ट्स में शामिल: खेल जगत में दिल्ली जिमखाना क्लब की सबसे बड़ी पहचान इसके ग्रास टेनिस कोर्ट्स हैं। यहां 26 सक्रिय ग्रास कोर्ट्स मौजूद हैं। विंबलडन जैसी कुछ चुनिंदा संस्थाओं को छोड़ दें, तो इतनी बड़ी संख्या में सक्रिय ग्रास कोर्ट्स दुनिया में बेहद कम जगहों पर हैं। यहां कई प्रतिष्ठित डेविस कप मुकाबले भी आयोजित हो चुके हैं।

‘जिमखाना’ शब्द का मतलब क्या है?

“जिमखाना” शब्द ब्रिटिश राज के दौर की भाषाई विरासत माना जाता है। माना जाता है कि यह फारसी शब्द “जमातखाना” और अंग्रेजी शब्द “जिम्नेजियम” के मेल से विकसित हुआ। औपनिवेशिक दौर में यह शब्द उन क्लबों के लिए इस्तेमाल होने लगा जहां खेलकूद और सामाजिक गतिविधियां दोनों होती थीं। आज भी भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और अन्य पूर्व ब्रिटिश उपनिवेशों में जिमखाना क्लब नाम वाले कई प्रतिष्ठित क्लब मौजूद हैं।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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