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चारधाम यात्रा के दौरान 19 अप्रैल से अब तक हुईं 53 मौतें, केदारनाथ में सर्वाधिक ने गंवाई जान

चारधाम यात्री की शुरुआत अप्रैल-मई से होती है और अक्टूबर-नवंबर तक चलती है। उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने लोगों से सावधानी बरतने की बात कही।

Char Dham Yatra 2026: उत्तराखंड की चारधाम यात्रा की शुरुआत इस साल 19 अप्रैल से हुई थी। इस साल अब तक रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। अब तक 15 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन कर लिए हैं। हालांकि, यात्रा के दौरान जान गंवाने वालों की संख्या भी चिंतित करने वाली है। अब तक 53 लोग यात्रा के दौरान जान गंवा चुके हैं।

राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) ने यात्रा के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के बारे में जानकारी दी है।

चारधाम यात्रा में 53 लोगों ने गंवाई जान

SEOC द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, केदारनाथ में सर्वाधिक 28 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। बद्रीनाथ में 10 लोगों की मौत हुई। वहीं, यमुनोत्री में 8 और गंगोत्री में 7 लोगों ने जान गंवाई है। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना ​​है कि ये मौतें दुर्घटनाओं के बजाय स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण हुई हैं, जिनमें दिल का दौरा, ऊंचाई पर होने वाली बीमारी, उच्च रक्तचाप और खराब मौसम प्रमुख कारण हैं।

ये आंकड़े एक चिंताजनक मिसाल कायम करते हैं। 2024 में तीर्थयात्रा के दौरान 246 तीर्थयात्रियों की मृत्यु हुई थी। वहीं 2025 की चारधाम यात्रा सत्र में 83 मौतें दर्ज की गईं। ऊंचाई वाले इलाकों, कम ऑक्सीजन स्तर और कठिन चढ़ाई वाले दुर्गम भूभाग से विशेष रूप से बुजुर्ग तीर्थयात्रियों और पहले से ही किसी बीमारी से ग्रसित लोगों को गंभीर खतरा है।

Crowd gathers at a brightly decorated temple structure set against snowy mountains during a festival.
चारधाम यात्रा फोटोः आईएएनएस

उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री ने सावधानी बरतने की अपील की

उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने इस संकट को स्वीकार किया। उन्होंने लोगों को सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंन कहा “यात्रा पूरी करने की जल्दी में तीर्थयात्री अक्सर अपने शरीर से मिलने वाले शुरुआती चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे दिल का दौरा और ऊंचाई पर होने वाली बीमारी की समस्या बढ़ जाती है।”

उन्होंने सरकार की तैयारियों की बात करते हुए कहा कि इन जोखिमों को कम करने के लिए चिकित्सा बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया है। मंत्री ने आगे कहा, “हमने यात्रा मार्ग पर 47 अस्पताल स्थापित किए हैं और विभिन्न पारगमन बिंदुओं पर लगभग 2,820 स्वास्थ्य कर्मियों के साथ 400 डॉक्टरों को तैनात किया है।”

यात्रा के दौरान इन गंभीर चिकित्सकीय परिस्थितियों से बचाव के लिए दून मेडिकल कॉलेज और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के 180 डॉक्टरों को उच्च ऊंचाई पर होने वाली बीमारियों, उच्च रक्तचाप और मधुमेह के प्रबंधन के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा, बद्रीनाथ और केदारनाथ में अतिरिक्त अस्पताल सुविधाएं शुरू करने के प्रयास जारी हैं।

आपातकालीन स्थितियों में प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सरकार विशेष ट्रॉमा केंद्रों के विकास को प्राथमिकता दे रही है। दून मेडिकल कॉलेज और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में इन केंद्रों को अपग्रेड किया जा रहा है। कौडियाला सहित संवेदनशील स्थानों पर भी केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है।

बताते चलें कि आमतौर पर चारधाम यात्रा की शुरुआत अप्रैल-मई से होती है और यह अक्टूबर-नवंबर तक चलती है। सर्दियों के दिनों में भारी बर्फबारी के चलते कपाट बंद कर दिए जाते हैं। चारधाम यात्रा के दौरान चार प्रमुख स्थानों यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ मंदिर और बद्रीनाथ मंदिर में दर्शन किए जाते हैं। यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री से होती है और बद्रीनाथ में समापन होता है।

इस साल यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल से हुई थी। यमुनोत्री और गंगोत्री मंदिर के दर्शन 19 अप्रैल से शुरू हुए थे और केदारनाथ मंदिर 22 अप्रैल को दर्शन के लिए खुला था। वहीं, बद्रीनाथ मंदिर के कपाट 23 अप्रैल को खुले थे।

यह भी पढ़ें – बंगाल में बुलडोजर एक्शन, हावड़ा स्टेशन के पास अतिक्रमण हटाने के लिए बड़े पैमाने पर हुई कार्रवाई



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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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