नई दिल्लीः सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (CBSE) ने कक्षा नौवीं से तीन भाषाओं की नीति अनिवार्य रूप से लागू करने की घोषणा की है। यह नीति इसी साल जुलाई से लागू होगी। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020 (NEP 2020) और राष्ट्रीय विद्यालय शिक्षा पाठ्यक्रम ढांचा (NCF-SE) 2023 के तहत लागू किया गया है। नई नीति के तहत 9वीं कक्षा के छात्रों को तीसरी भाषा के विषय के लिए परीक्षा देनी होगी। हालांकि, 10वीं के छात्रों को इससे छूट रहेगी।
सीबीएसई ने इस संबंध में शनिवार (15 मई) को एक सर्कुलर जारी किया है। इसके मुताबिक, छात्रों को R1, R2 and R3 के रूप में तीन भाषाओं को पढ़ना अनिवार्य किया गया है। इनमें से दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। बोर्ड ने हालांकि कहा है कि 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों को तीसरी भाषा का पेपर नहीं लिया जाएगा। ऐसा छात्रों पर अकादमिक दबाव कम करने के उद्देश्य से किया गया है।
CBSE ने त्रिभाषा पद्धति को लेकर क्या कहा?
बोर्ड ने कहा है कि तीसरी भाषा (R3) के लिए मूल्यांकन संबंधी सभी प्रक्रिया आंतरिक रूप से स्कूलों द्वारा ही कराई जाएगी। इस विषय में छात्रों के प्रदर्शन को रिकॉर्ड के रूप में रखा जाएगा और सर्टिफिकेट में भी दर्ज किया जाएगा। हालांकि, किसी भी छात्र को R3 के चलते हाई स्कूल की परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा।
सीबीएसई द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक, स्कूल बोर्ड द्वारा जारी की गई विषय सूची में भाषा का चुनाव कर सकते हैं। स्कूलों को दो भारतीय भाषाएं चुननी अनिवार्य हैं। विदेशी भाषाओं को तीसरी भाषा के रूप में केवल तभी लिया जा सकेगा जब पहली दो भारतीय भाषाएं हों या फिर अभ्यर्थी उसे चौथी भाषा के रूप में भी चुन सकते हैं।

लागू करने के लिए क्या हैं चुनौतियां?
इस परिवर्तन प्रक्रिया के तहत सीबीएसई ने कहा कि 2026 में कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाले छात्र शुरुआत में तीसरी भाषा के लिए कक्षा VI के स्तर की पाठ्यपुस्तकों से अध्ययन करेंगे। जब तक कि माध्यमिक स्तर की विशेष पाठ्यपुस्तकें विकसित और लागू नहीं हो जातीं। इसके तहत स्कूलों को सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसके साथ ही स्थानीय और क्षेत्रीय साहित्यिक सामग्री से क्लास एजुकेशन को समृद्ध करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है।
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हालांकि, त्रिभाषा प्रणाली लागू होने से कुछ स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और बुनियादी ढांचे को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं। इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए, सीबीएसई ने योग्य भाषा शिक्षकों की कमी का सामना कर रहे स्कूलों को सलाह दी है कि वे अस्थायी उपाय अपनाएं जैसे कि आस-पास के स्कूलों के साथ शिक्षण संसाधन साझा करें, वर्चुअल लर्निंग सपोर्ट लें या सेवानिवृत्त शिक्षकों और मास्टर्स कर चुके योग्य शिक्षकों को नियुक्त करें।
बोर्ड ने यह भी घोषणा की कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CwSN), भारत के बाहर स्थित स्कूलों और देश में लौटने वाले विदेशी छात्रों को छूट प्रदान की जाएगी।

