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NCB ने बड़े अंतर्राष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का किया भंडाफोड़, 182 करोड़ रुपये का ‘जिहादी ड्रग’ जब्त

NCB ने ऑपरेशन RAGEPILL के तहत अंतर्राष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।

नई दिल्लीः मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो (NCB) ने ऑपरेशन RAGEPILL को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इसके तहत करीब 227.2 किलोग्राम कैप्टागन टैबलेट और पाउडर जब्त किया गया। इसकी कीमत लगभग 182 करोड़ रुपये बताई जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार (16 मई) को इस ऑपरेशन की जानकारी दी।

उन्होंने ऑपरेशन RAGEPILL को एनसीबी द्वारा अंजाम देने की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए दी। एक्स पोस्ट पर उन्होंने एक विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी की जानकारी दी और बताया कि इस ऑपरेशन के तहत पश्चिमी एशिया भेजी जा रही एक खेप को जब्त किया गया। अमित शाह ने कैप्टागन को ‘जिहादी ड्रग’ बताया है।

ऑपरेशन RAGEPILL एनसीबी द्वारा चलाया गया एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय अभियान है। इसके तहत अंतर्राष्ट्रीय ड्रग तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया और कैप्टागन की जब्ती की गई।

NCB ने ऑपरेशन RAGEPILL के तहत मुंद्रा पोर्ट और दिल्ली से हुई जब्ती

एनसीबी द्वारा यह जब्ती गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह और दिल्ली के नेब सराय इलाके से हुई है। इस मामले में एक सीरियाई नागरिक की गिरफ्तारी हुई है। उसने चाय की पत्तियों के डिब्बे में इसे छुपाकर रखा था।

अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ‘ड्रग-फ्री इंडिया’ के संकल्प के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस कार्रवाई को भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का मजबूत उदाहरण बताया।

यह भी पढ़ें – क्या सिर्फ भारत में लीक होते हैं परीक्षा के पेपर? चीन और दक्षिण कोरिया से क्या सीख सकता है भारत

अमित शाह ने कहा कि भारत अपनी जमीन का इस्तेमाल ड्रग्स की तस्करी के लिए किसी भी हाल में नहीं होने देगा और देश में आने या यहां से बाहर भेजे जाने वाले हर एक ग्राम नशीले पदार्थ पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की टीम की सराहना करते हुए उन्हें बहादुर और सतर्क योद्धा बताया।

क्या है जिहादी ड्रग?

‘कैप्टागन’ असल में फेनेथिलिन नामक एम्फेटामिन आधारित ड्रग का रूप है। मध्य पूर्व के युद्धग्रस्त इलाकों और आतंकी संगठनों के लड़ाकों के बीच इसके इस्तेमाल की वजह से इसे ‘जिहादी ड्रग’ कहा जाता है।

समाचार एजेंसी आईएएनएस की खबर के मुताबिक, इस ड्रग का सेवन करने के बाद इंसान को दर्द, डर या थकान का एहसास कम हो जाता है। यही वजह है कि इसे लड़ाई और हिंसक गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाता रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की ड्रग्स न केवल युवाओं को बर्बाद करती हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय अपराध और आतंक नेटवर्क को भी बढ़ावा देती हैं।

एजेंसियां इस मामले में सीरियाई नागरिक की कथित आतंकी संलिप्तता की जांच कर रही हैं। यह सीरयाई नागरिक दिल्ली में काम कर रहा था और पश्चिमी एशिया में ड्रग भेज रहा था।

हिंदुस्तान टाइम्स ने मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी के हवाले से लिखा कि “ इस ऑपरेशन में लगभग 200 किलोग्राम कैप्टागन सीरिया से आया था और सऊदी अरब भेजा जा रहा था। जांच जारी है। ”

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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