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कौन हैं सेल्वी एस. कीर्तना? विजय कैबिनेट की एकमात्र महिला और सबसे युवा मंत्री

सक्रिय राजनीति में आने से पहले कीर्तना राजनीतिक सलाहकार और डिजिटल कैंपेन रणनीतिकार के तौर पर काम कर चुकी हैं। उन्होंने शोटाइम कंसल्टिंग और आईपैक (IPAC) जैसी संस्थाओं के साथ काम किया।

चेन्नई: तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) प्रमुख सी. जोसेफ विजय के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही उनकी कैबिनेट में शामिल एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। यह नाम है सेल्वी एस. कीर्तना का, जो महज 29 साल की उम्र में विजय सरकार की सबसे युवा और इकलौती महिला मंत्री बनी हैं।

विरुधुनगर जिले की सिवाकासी विधानसभा सीट से जीतकर आईं कीर्तना को तमिलनाडु की नई राजनीति का उभरता चेहरा माना जा रहा है। शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने कहा, “अब सब कुछ बदलने वाला है, बल्कि बदलाव आ चुका है। सी. जोसेफ विजय मुख्यमंत्री बन चुके हैं। मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से हूं और मुझे कैबिनेट मंत्री बनने का मौका मिला है। दूसरे राज्यों में इतनी आसानी से ऐसा शायद ही संभव हो।”

उन्होंने विजय की कार्यशैली की तारीफ करते हुए कहा, “विजय लोगों की क्षमता और प्रतिभा को महत्व देते हैं। हम सभी बदलाव लाने के लिए यहां हैं। यह सरकार 35 से 50 साल तक चल सकती है और सबसे लंबे समय तक रहने वाली सरकार बन सकती है।”

कीर्तना ने शपथ लेने से पहले दिए एक इंटरव्यू में कहा था, “मैंने हमेशा खुद को राजनीति में देखा है। यही वजह थी कि मैंने राजनीतिक रणनीतिकार के तौर पर करियर चुना।”

उन्होंने बताया कि अलग-अलग नेताओं के साथ काम करने के दौरान उन्हें शासन व्यवस्था, प्रशासनिक ढांचे और नौकरशाही के कामकाज को करीब से समझने का मौका मिला।

एस. कीर्तना: साधारण परिवार से मंत्री पद तक का सफर

1996 में विरुधुनगर में जन्मीं कीर्तना ने तमिल माध्यम के सरकारी स्कूल से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज से गणित में बीएससी की डिग्री हासिल की।

बाद में उन्होंने 2019 में पुडुचेरी विश्वविद्यालय से सांख्यिकी (स्टैटिस्टिक्स) में एमएससी किया। अपने चुनावी हलफनामे में उन्होंने खुद को पर्सनल कंसल्टेंट बताया है। उनकी कुल घोषित संपत्ति करीब 22.57 लाख रुपये है।

सक्रिय राजनीति में आने से पहले कीर्तना राजनीतिक सलाहकार और डिजिटल कैंपेन रणनीतिकार के तौर पर काम कर चुकी हैं। उन्होंने शोटाइम कंसल्टिंग और आईपैक (IPAC) जैसी संस्थाओं के साथ काम किया।

इस दौरान वह तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), डीएमके और अन्य दलों के चुनावी अभियानों से जुड़ी रहीं। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के चुनाव अभियानों में भी काम किया।

ये भी पढ़ेंः विजय ने शपथ लेते ही किए बड़े फैसले, 200 यूनिट मुफ्त बिजली और महिला सुरक्षा टास्क फोर्स का ऐलान

एक साथ 5 भाषाओं पर पकड़, हिंदी में बातचीत रही थी चर्चा में

कीर्तना की एक खास पहचान उनकी बहुभाषी क्षमता है। वह तमिल, अंग्रेजी, हिंदी, तेलुगु समेत कई भाषाएं धाराप्रवाह बोलती हैं। चुनाव जीतने के बाद जब उन्होंने हिंदी में मीडिया से बात की थी, तो इसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई थी।

इस पर उन्होंने कहा था, “मैं चाहती हूं कि मेरी पार्टी का संदेश पूरे भारत और दुनिया तक पहुंचे। हर किसी को मेरे नेता और पार्टी के बारे में पता होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि कई भाषाएं सीखने से उन्हें अलग-अलग राज्यों में काम करने और लोगों से सीधे जुड़ने का अवसर मिला। इसी प्रक्रिया में मैंने कई भाषाएं सीखीं। मुझे नई भाषाएं सीखना पसंद है। जब मीडिया के लोग मेरे पास आए तो मुझे लगा कि यह टीवीके के संदेश को तमिलनाडु के बाहर देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने का अच्छा अवसर है।

सिवाकासी सीट से कीर्तना ने 68,709 वोट हासिल कर कांग्रेस उम्मीदवार अशोकन जी को 11,670 वोटों के अंतर से हराया। अशोकन को 57,039 वोट मिले, जबकि एआईएडीएमके के पूर्व मंत्री के.टी. राजेंद्र बालाजी 51,078 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। उन्हें सिवाकासी से सात दशक में जीतने वाली पहली महिला विधायक माना जा रहा है।

क्यों चुनी TVK?

कीर्तना का कहना है कि टीवीके ने उन्हें बिना किसी राजनीतिक या आर्थिक पृष्ठभूमि के भी अवसर दिया। उन्होंने कहा, “टीवीके ऐसी पार्टी है जहां हर किसी की पहुंच है। अगर आपके भीतर लोगों के लिए काम करने का इरादा है, तो यहां आपका स्वागत है।”

पटाखा उद्योग के लिए मशहूर सिवाकासी को भारत की ‘फायर क्रैकर कैपिटल’ कहा जाता है। यहां फैक्ट्री हादसे और विस्फोट की घटनाएं अक्सर चिंता का विषय रही हैं। कीर्तना ने चुनाव प्रचार के दौरान सिवाकासी के लिए अलग घोषणापत्र तैयार किया था, जिसमें औद्योगिक सुरक्षा, रोजगार और स्थानीय विकास पर खास जोर दिया गया था।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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