मुंबई के मीरा रोड इलाके में 27 अप्रैल को तड़के हुई चाकूबाजी की घटना को लेकर सामने आ रही बातों ने अब इसे एक भयावह मोड़ दे दिया है। जांचकर्ता अब इसे कट्टरपंथी विचारधारा से प्रेरित लोन वुल्फ टेरर अटैक (एक अकेले शख्स द्वारा आतंकवादी हमला) के रूप में देख रहे हैं। ऐसे मामलों में कोई व्यक्ति किसी आतंकी ग्रुप का सदस्य बने बगैर हिंसा को अंजाम देता है, लेकिन वैचारिक रूप से आतंकवादी समूहों से प्रभावित होता है।
यह घटना सोमवार को तड़के करीब 4 बजे नया नगर स्थित एक निर्माणाधीन स्थल पर हुई, जहां राजकुमार मिश्रा और सुब्रतो सेन नामक दो सुरक्षा गार्डों पर हमला किया गया। दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए और शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार उनमें से एक की हालत गंभीर थी। हमले के मकसद और तरीके का पता चलने के बाद, जो मामला पहले मामूली मारपीट का लग रहा था, अब और भी गंभीर हो गया है।
धर्म पूछने के बाद हमला?
मुंबई पुलिस के अनुसार, आरोपी जैब जुबैर अंसारी ने हमला करने से पहले जानबूझकर पीड़ितों की पहचान की थी। आरोप है कि उसने गार्डों के पास जाकर उनके नाम पूछे, उनके धर्म के बारे में पूछताछ की और यह जानने की भी कोशिश की कि क्या वे कलमा पढ़ सकते हैं। जब वे ऐसा करने में विफल रहे, तो उसने चाकू निकाला और उन पर वार कर दिया।
जांचकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की पूछताछ से स्पष्ट संकेत मिलता है कि पीड़ितों को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि जुबैर 2019 में अमेरिका से भारत लौटा था और यहां कुछ महीने पहले तक एक कोचिंग में पढ़ाता था।
पुलिस अधिकारियों ने इस कृत्य को धार्मिक रूप से प्रेरित बताया है और इसे ‘लोन वुल्फ’ पैटर्न के अनुरूप बताया है। यह मामला अब महाराष्ट्र आतंकवाद-विरोधी दस्ते (एटीएस) को सौंप दिया गया है, जो कट्टरपंथी प्रचार से संभावित संबंधों की जांच कर रहा है।
प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि अंसारी ऑनलाइन कंटेंट के माध्यम से कट्टरपंथी बना होगा। एटीएस सूत्रों के अनुसार, उसके डिजिटल फुटप्रिंट में कई टेलीग्राम चैनलों तक पहुंच शामिल है जो जिहाद की चरमपंथी व्याख्याओं का प्रचार करते हैं। जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर गाजा जैसे वैश्विक संघर्षों का जिक्र करने वाली सामग्री के साथ-साथ ‘वास्तविक जिहाद’ के विचार को दर्शाने वाले नोट्स भी बरामद किए हैं।
आतंकी संगठन के शामिल होने के सबूत नहीं
अभी तक किसी आतंकी संगठन से सीधे संपर्क का कोई सबूत नहीं मिला है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि आरोपी ISIS जैसे समूहों से जुड़े दुष्प्रचार से प्रेरित हो सकता है। यह हाल के वर्षों में देखे ग पैटर्न को दर्शाता है, जहां व्यक्ति औपचारिक रूप से किसी आतंकी संगठन से जुड़े बगैर ऑनलाइन माध्यमों से स्वयं कट्टरपंथी बन जाते हैं।
बहरहाल, मुंबई की इस घटना ने पहलगाम जैसे आतंकी हमले की भी याद दिला दी है, जहां पीड़ितों को उनकी पहचान जानने के बाद निशाना बनाया गया था।
इधर अधिकारियों ने जांच तेज कर दी है, मीरा रोड स्थित आरोपी के आवास पर तलाशी ली गई है और आगे की पूछताछ जारी है। अधिकारियों का कहना है कि उनका ध्यान आरोपी के कट्टरपंथी विचारों की सीमा, संभावित संपर्कों और इस बात पर केंद्रित है कि क्या अन्य लोग भी इसी तरह की ऑनलाइन सामग्री से प्रभावित हुए होंगे।
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