नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में माओवादी विरोधी अभियानों में एक बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षा बलों ने कांकेर जिले के घने जंगलों में सोमवार को एक भीषण मुठभेड़ में शीर्ष महिला कमांडर रूपी को मार गिराया। छोटेबेठिया-परतापुर पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले माछपल्ली-आरामझोरा-हिदुर इलाके में चलाए गए इस अभियान से क्षेत्र में कमजोर पड़ चुके माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
रूपी नक्सली संगठन में एरिया कमेटी मेंबर (एसीएम) थी। उस पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। बताया जा रहा है कि वह इस इलाके सक्रिय आखिरी सबसे सीनियर तेलुगू नक्सल थी।
कांकेर के पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा कहा कि सभी सीनियर नक्सलियों के आत्मसमर्पण या खात्मे के बाद बस्तर क्षेत्र में रूपी ही एकमात्र बड़ी नक्सली बची थी। पुलिस ने मुठभेड़ स्थल से उसके शव के साथ एक हथियार भी बरामद किया है। अधिकारी नक्सलियों से बार-बार आत्मसमर्पण करने और मुख्यधारा में शामिल होने की अपील कर रहे हैं, लेकिन रूपी ने अपनी गतिविधियां जारी रखने का विकल्प चुना, जिसके बाद ये टकराव हुआ।
इंटेलिजेंस इनपुट के बाद मुठभेड़
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार सशस्त्र माओवादियों की मौजूदगी के बारे में सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस और सुरक्षा बलों की एक संयुक्त टीम ने वन क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया। इसके बाद माछपल्ली इलाके में गोलीबारी हुई, क्योंकि माओवादी कैडरों ने सुरक्षा बलों पर गोलियां चलानी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई।
गोलीबारी थमने पर सुरक्षाकर्मियों ने मुठभेड़ स्थल से एक महिला माओवादी कैडर का शव बरामद किया। रूपी एक एरिया कमेटी मेंबर (एसीएम) रैंक की माओवादी कमांडर और संघठन के दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) विजय रेड्डी की पत्नी थीं, जिसे 2025 में मानपुर-मोहला जिले में एक मुठभेड़ में मारा गया था।
सुरक्षा अधिकारियों का अनुमान है कि कांकेर क्षेत्र में लगभग दस माओवादी कैडर अभी भी सक्रिय हैं। तलाशी अभियान जारी है और सुरक्षा बल शेष कार्यकर्ताओं को पकड़ने के लिए आसपास के जंगलों की छानबीन कर रहे हैं।
रूपी के मारे जाने को प्रतीकात्मक और रणनीतिक दोनों तरह की जीत के रूप में देखा जा रहा है। प्रतीकात्मक इसलिए क्योंकि उसके शीर्ष माओवादी नेतृत्व से संबंध थे और रणनीतिक इसलिए क्योंकि इससे बस्तर में पहले से ही कम हो रही माओवादी उपस्थिति और कमजोर हो गई है।
400 माओवादी कैडर कर चुके हैं समर्पण
एनकाउंटर का यह ताजा घटनाक्रम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा देश से नक्सलवाद को खत्म करने की सार्वजनिक रूप से घोषित समय सीमा 31 मार्च के कुछ सप्ताह बाद सामने आया है। केंद्र की सख्ती के बाद इस साल के पहले चार महीनों में बस्तर में लगभग 400 माओवादी कार्यकर्ताओं ने अपने हथियार डाल दिए हैं और मुख्यधारा में शामिल हुए हैं।
हालिया मुठभेड़ पर प्रतिक्रिया देते हुए, बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदर राज पाटिलिंगम ने कहा कि बड़ी संख्या में माओवादी कार्यकर्ताओं ने प्रशासन और सुरक्षा बलों की अपीलों पर ध्यान दिया है और पुनर्वास में शामिल हो रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि ‘रूपी जैसे कुछ कार्यकर्ताओं ने पुनर्वास का रास्ता त्याग दिया और हिंसक मार्ग अपनाए हुए हैं, जिसके परिणामस्वरूप आज वो मारी गई है।’
बता दें कि गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में संसद को बताया था कि देश प्रभावी रूप से नक्सल मुक्त हो चुका है। नक्सली अब केवल कुछ छिटपुट इलाकों तक ही सीमित हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि चल रहे सुरक्षा अभियानों के माध्यम से इन बचे हुए क्षेत्रों को भी जल्द ही नक्सल मुक्त कर दिया जाएगा।
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