Monday, April 13, 2026
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी नाकेबंदी के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल, बाजार में भी भारी गिरावट

सेंट्रल कमांड के मुताबिक, होर्मुज पर सोमवार सुबह (न्यूयॉर्क समयानुसार 10 बजे) से यह नाकेबंदी लागू कर दी गई है। इसके तहत उन सभी जहाजों को रोका जाएगा जो ईरान के बंदरगाहों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से निकल रहे हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद बाद हालात और तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर यूएस सेंट्रल कमांड (सीईएनटीसीओएम) ने समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकेबंदी लागू करने का फैसला किया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई है।

सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल देखा गया। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 8.36% बढ़कर 103.16 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 8.22% उछलकर 104.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यूरोप में गैस वायदा कीमतें भी एक समय लगभग 18% तक चढ़ गईं।

इसके साथ ही कारोबारी हफ्ते के पहले दिन शेयर बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिला। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स करीब 1600 अंकों की गिरावट के साथ 76132.83 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 500 अंकों की गिरावट के साथ 23570.60 पर कारोबार कर रही थी।

सेंट्रल कमांड के मुताबिक, सोमवार सुबह (न्यूयॉर्क समयानुसार 10 बजे) से यह नाकेबंदी लागू कर दी गई है। इसके तहत उन सभी जहाजों को रोका जाएगा जो ईरान के बंदरगाहों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से निकल रहे हैं। कमर्शियल नाविकों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक नेविगेशन चेतावनियों पर नजर रखें और इस इलाके में काम करते समय अमेरिकी नेवी फोर्स के संपर्क में रहें।

हालांकि, अमेरिका ने गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच आने-जाने वाले जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे रखी है। यानी यह पूरी तरह ‘ब्लैंकेट ब्लॉकेड’ नहीं, बल्कि लक्षित नाकेबंदी है। ईरान ने इस संघर्ष की शुरुआत से ही होर्मुज पर नाकेबंदी कर रखी है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ट्रंप ने क्या कुछ कहा है?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार कहा था कि दूसरे मुद्दों पर प्रगति के बावजूद ईरान के साथ बातचीत उसके परमाणु कार्यक्रम पर आकर अटक गई है। ट्रंप के इस बयान के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से नाकेबंदी से जुड़ा आधिकारिक बयान जारी किया गया।

ट्रंप ने कहा, “ज्यादातर मुद्दों पर सहमति बन गई थी, लेकिन जो सबसे अहम था न्यूक्लियर, उस पर कोई समझौता नहीं हो सका।” उन्होंने यह भी ऐलान किया कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज में आने-जाने वाले जहाजों को रोकने की प्रक्रिया शुरू करेगी।

ट्रंप ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह होर्मजु स्ट्रेट में बारूदी सुरंगों (नेवल माइंस) के खतरे का इस्तेमाल कर वैश्विक स्तर पर जबरन वसूली कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो कोई भी गैर-कानूनी टोल देगा, उसे खुले समुद्र में सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा। साथ ही अमेरिकी सेना ने यह भी संकेत दिया कि वह स्ट्रेट में बिछाई गई संभावित माइंस को निष्क्रिय करने का अभियान शुरू करेगी।

ट्रंप के फैसले पर ईरान का जवाब

हालांकि, ईरान ने इस कदम का तीखा विरोध किया है। इससे साफ है कि नाकेबंदी के फैसले ने दोनों देशों के बीच चल रही अंतिम चरण की बातचीत को लगभग पटरी से उतार दिया है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि तेहरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अच्छी नीयत से बातचीत की थी और समझौते से वह बस कुछ कदम दूर था, लेकिन अचानक नाकेबंदी का फैसला सामने आ गया। उन्होंने कहा कि अच्छी नीयत से अच्छी नीयत पैदा होती है, दुश्मनी से दुश्मनी।

इस पूरे विवाद पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का मानना है कि टकराव की जड़ होर्मुज में मौजूद अनिश्चितता है, जहां ईरान पर आरोप है कि वह माइंस के खतरे का हवाला देकर वैश्विक शिपिंग पर दबाव बना रहा है।

इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के मुताबिक, ईरान द्वारा कुछ समुद्री मार्गों को खतरनाक क्षेत्र घोषित करने के बाद कई जहाजों को अपनी पारंपरिक सुरक्षित लेन छोड़नी पड़ी। इससे वे अनजाने में ईरान के नियंत्रण वाले जलक्षेत्र में प्रवेश करने लगे, जहां उनसे “प्रोटेक्शन फीस” वसूले जाने के आरोप हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत ऐसी फीस अवैध है और किसी भी तटीय देश को इस तरह आवाजाही पर रोक या शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। माइंस के खतरे और बढ़ते तनाव का असर पहले ही बाजार पर दिख रहा है। तेल की कीमतों के साथ-साथ शिपिंग इंश्योरेंस भी महंगा हो गया है, भले ही अब तक सीधे हमले सीमित रहे हों।

इसी रणनीति का मुकाबला करने के लिए अमेरिकी नौसेना ने सक्रिय अभियान शुरू कर दिया है। यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन और यूएसएस माइकल मर्फी जैसे युद्धपोत स्ट्रेट में गश्त कर रहे हैं, ताकि सुरक्षित रास्ता दिखाया जा सके और माइंस को हटाने का काम तेजी से किया जा सके।

सेंट्रल कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा है कि जैसे ही सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित होगा, उसकी जानकारी नागरिक जहाजों के साथ साझा कर दी जाएगी, ताकि वैश्विक शिपिंग पर असर कम किया जा सके।

यह भी पढ़ें- अमेरिका-ईरान के बीच इस्लामाबाद में वार्ता हुई फेल, ये रहीं मुख्य वजहें

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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