TCS Conversion Case: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के आरोपों के बाद नासिक स्थित अपनी इकाई में कई कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। कंपनी ने हालांकि निलंबित कर्मचारियों की सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया है।
इससे पहले नासिक पुलिस ने इस मामले के संबंध में छह कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार किए गए लोगों में से अधिकांश कथित तौर पर वरिष्ठ पदों पर थे। इनमें टीम लीडर भी शामिल थे।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला इस साल मार्च में सामने आया। 25 मार्च को एक युवती ने देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई कि वह मुंबई नाका इलाके में स्थित एक बीपीओ कार्यालय में काम करती है। शिकायत में उसने आरोप लगाया कि 2022 से 2026 के बीच तीन सहकर्मियों जिनमें एक महिला भी शामिल थी, ने उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, युवती ने एक पुरुष सहकर्मी पर कई बार यौन शोषण और छेड़छाड़ का भी आरोप लगाया। नासिक पुलिस ने महिला के दावों की जांच शुरू कर दी है और अन्य कर्मचारियों से भी इसी तरह के आरोप होने पर आगे आने की अपील की है।
इस मामले में पुलिस ने 3 अप्रैल तक नौ एफआईआर दर्ज की हैं। इनमें से आठ महिला कर्मियों द्वारा यौन उत्पीड़न और धर्म से संबंधित अनुचित टिप्पणियों का आरोप लगाते हुए दर्ज कराई गईं। वहीं एक पुरुष कर्मचारी द्वारा धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का हवाला देते हुए दर्ज कराई गई है।
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शिकायत करने वालों में से कई लोगों ने यह भी कहा कि उन्होंने इन मुद्दों को कंपनी के मानव संसाधन विभाग के सामने उठाया था लेकिन आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
TCS ने क्या कहा?
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, तौसीफ अत्तार, दानिश शेख और एक महिला के रूप में हुई है। महिला की पहचान अभी तक उजागर नहीं की गई है। इन सातों में से छह मजिस्ट्रेट की हिरासत में हैं जबकि एक कथित तौर पर फरार है।
आठवीं आरोपी कंपनी की मानव संसाधन प्रबंधक जो नासिक कार्यालय में मानव संसाधन का काम संभालती थी। वह भी प्रबंधन की नजर में है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वह फिलहाल पुलिस हिरासत में है।
इस संबंध में कंपनी TCS ने 12 अप्रैल को एक बयान में पुष्टि की कि नासिक मामले के संबंध में कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है।
कंपनी ने कहा ” टीसीएस की उत्पीड़न और किसी भी प्रकार के दबाव के प्रति लंबे समय से शून्य-सहिष्णुता (जीरो टोलरेंस) नीति रही है। हमने कार्यस्थल पर अपने कर्मचारियों की सुरक्षा और कल्याण के उच्चतम मानकों को हमेशा सुनिश्चित किया है। नासिक मामले की जानकारी मिलते ही हमने तुरंत कार्रवाई की। जिन कर्मचारियों की जांच चल रही है, उन्हें जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया गया है। हम स्थानीय कानून प्रवर्तन अधिकारियों के साथ सहयोग कर रहे हैं और आगे की कार्रवाई इस जांच के निष्कर्ष के आधार पर की जाएगी। “

