नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने बुधवार को पश्चिम बंगाल की कूच बिहार दक्षिण विधानसभा सीट के पर्यवेक्षक और यूपी के IAS अधिकारी अनुराग यादव को उनके पद से हटा दिया। सामने आई जानकारी के अनुसार यह फैसला बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर तैनात पर्यवेक्षकों के साथ हुई वर्चुअल बैठक के बाद लिया गया।
सूत्रों के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने यादव को हटाने का निर्णय इसलिए लिया क्योंकि अनुराग यादव कथित तौर पर अपने यहां कुल मतदान केंद्रों की संख्या जैसी बुनियादी जानकारी भी तत्काल उपलब्ध कराने में विफल रहे थे। ऐसी भी खबरें हैं कि मीटिंग के दौरान ज्ञानेश कुमार की टिप्पणी पर अनुराग यादव ने सख्ती से जवाब दिया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया था।
रिव्यू मीटिंग में क्या हुआ ऐसा?
सूत्रों के अनुसार वर्चुअल मीटिंग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सभी अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ले रहे थे। इसी क्रम में वे बारी-बारी से अधिकारियों ये भी पूछ रहे थे कि उनके यहां कितने मतदान केंद्र हैं। इसी दौरान जब अनुराग यादव की बारी आई तो उन्हें जवाब देने में थोड़ी देरी हुई। इस पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कुछ टिप्पणी कर दी।
IAS अनुराग यादव ने हालांकि ज्ञानेश कुमार की टिप्पणी पर सख्त ऐतराज जताते हुए जवाब दिया कि वे इस तरह बात नहीं कर सकते। उन्होंने जवाब में ये तक कहा कि वे भी इस सेवा में 25 साल गुजार चुके हैं। अनुराग यादव की इस प्रतिक्रिया पर बैठक में कुछ देर के लिए चुप्पी छा गई और फिर चुनाव तैयारियों से जुड़े दूसरे विषयों पर बात होने के बाद मीटिंग खत्म हुई।
अनुराग यादव वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में प्रधान सचिव स्तर पर तैनात हैं। हाल में उन्हें सोशल वेलफेयर और सैनिक कल्याण विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी।
तृणमूल कांग्रेस ने मामले पर क्या कहा?
पूरे मामले पर तृणमूल कांग्रेस की भी प्रतिक्रिया आई है। एक अखबार के अनुसार कूच बिहार तृणमूल के अध्यक्ष अभिजीत दे भौमिक ने कहा, ‘मुख्य चुनाव आयुक्त ने 25 साल के अनुभव वाले आईएएस अधिकारी से कहा कि उन्हें घर वापस चले जाना चाहिए।’
तृणमूल नेता ने कहा, ‘पिछले कुछ दिनों से हम (तृणमूल के नेता और कार्यकर्ता) यादव की गतिविधियों से परेशान थे, क्योंकि हमारे प्रचारी सामग्री हटा दी गई थी और हमारे लिए बाधाएं खड़ी की जा रही थी। फिर भी, चुनाव आयोग ने उन पर और दबाव डाला। अनुराग यादव ने इस पर प्रतिक्रिया दी। इससे पता चलता है कि आईएएस अधिकारियों का एक वर्ग चुनाव आयोग के तर्कहीन निर्देशों का पालन करने को तैयार नहीं है।’
कूच बिहार और बंगाल में चुनावी हिंसा का हाल
पश्चिम बंगाल हमेशा से चुनावी हिंसा के लिए बदनाम रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में 2021 में मतदान के दौरान कूच बिहार के सीतालकुची में हिंसा में एक दिन में पांच लोग मारे गए थे। इसमें कुछ की मौत केंद्रीय बलों की फायरिंग में भी हुई थी।
वहीं, 2023 में पंचायत चुनाव से पहले, जिलों के कम से कम तीन राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या हुई थी।
आकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश (403 सीटें), पश्चिम बंगाल (294 सीटें), महाराष्ट्र (288 सीटें), बिहार (243 सीटें), तमिलनाडु (234 सीटें), मध्य प्रदेश (230 सीटें), कर्नाटक (224 सीटें) और राजस्थान (200 सीटें) जैसे बड़े राज्यों में अब तक हुए 16 चुनावों में से पश्चिम बंगाल में 2016 और 2021 के चुनावों में सबसे अधिक हिंसक घटनाएं हुईं।
स्वतंत्र संघर्ष निगरानी संस्था – आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेश एंड इवेंट डेटा (ACLED) द्वारा संकलित आंकड़ों के एक अध्ययन के अनुसार 2021 के बंगाल चुनाव में सबसे ज्यादा हिंसा देखी गई। इसमें आदर्श आचार संहिता लागू होने से लेकर नई सरकार के गठन तक हुई 354 घटनाओं में से 278 घटनाएं हिंसा की थीं।

