Monday, April 6, 2026
Homeमनोरंजनक्या ट्रंप की बदलती बयानबाजी के पीछे AI का हाथ है? राम...

क्या ट्रंप की बदलती बयानबाजी के पीछे AI का हाथ है? राम गोपल वर्मा ने इस बात को लेकर जताई चिंता

राम गोपाल वर्मा ने अपने पोस्ट में ट्रंप के बयानों में आने वाले उतार-चढ़ाव का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कि एक पल में राष्ट्रपति “बड़े पैमाने पर लड़ाई खत्म होने” का ऐलान करते हैं और अगले ही पल उसे “एक छोटी-सी मुहिम” बता देते हैं।

अपनी बेबाक राय के लिए मशहूर दिग्गज फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी नीति पर खास टिप्पणी की है। सोमवार को सोशल मीडिया पर सक्रिय होते हुए वर्मा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कार्यशैली और उनके हालिया विरोधाभासी बयानों पर गहरी चिंता व्यक्त की।

फिल्ममेकर ने कहा कि ट्रंप जिस तेजी से अपने सैन्य और राजनीतिक फैसले बदल रहे हैं, उससे ऐसा लगता है कि वह मानवीय सलाहकारों के बजाय केवल ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) के इशारों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ओवल ऑफिस में अब फैसले इंसानी दिमाग के बजाय एल्गोरिदम के जरिए लिए जा रहे हैं।

ट्रंप की ‘यूटर्न’ राजनीति का जिक्र

राम गोपाल वर्मा ने अपने पोस्ट में ट्रंप के बयानों में आने वाले उतार-चढ़ाव का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कि एक पल में राष्ट्रपति “बड़े पैमाने पर लड़ाई खत्म होने” का ऐलान करते हैं और अगले ही पल उसे “एक छोटी-सी मुहिम” बता देते हैं। वर्मा ने राष्ट्रपति की उस धमकी की ओर भी इशारा किया जिसमें उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट न खोलने की सूरत में ईरान के पावर प्लांट और पुलों को उड़ाने की चेतावनी दी है।

उन्होंने कहा कि दिलचस्प बात यह है कि ईरान को “पाषाण युग” में भेजने की धमकी देने के कुछ ही देर बाद ट्रंप अचानक “सार्थक बातचीत” की वकालत करने लगते हैं और दावा करते हैं कि वहां “सत्ता परिवर्तन” पहले ही हो चुका है।बयानों में यह निरंतर विरोधाभास किसी सामान्य मानवीय परामर्श का परिणाम नहीं हो सकता।

‘ट्रंप की छवि एक ऐसे नेता की रही है….’

वर्मा ने अपनी रिपोर्टनुमा पोस्ट में सवाल किया कि आखिर किस तरह की ‘ह्यूमन इंटेलिजेंस’ हर कुछ घंटों में ऐसी जानकारी दे सकती है जो इतने बड़े बदलावों को सही ठहरा सके। ट्रंप की छवि एक ऐसे नेता की रही है जो अपने जनरलों की बात नहीं मानते और सलाहकारों पर अविश्वास करते हैं।

राम गोपाल कहते हैं, पारंपरिक ब्रीफिंग, सैटेलाइट फीड या कैबिनेट की चर्चाएं ‘मानवीय गति’ से चलती हैं, जो इतनी जल्दी युद्ध के लक्ष्यों या आर्थिक परिणामों को कैलिब्रेट नहीं कर सकतीं। इसके विपरीत, एआई लाइव डेटा, सोशल मीडिया सेंटिमेंट और तेल की कीमतों जैसे हजारों कारकों को सेकंडों में विश्लेषित कर ‘क्या होगा अगर’ वाले परिदृश्य तैयार कर सकता है। राम गोपाल ने आरोप लगाया कि ट्रंप एक ‘एआई को-पायलट’ का उपयोग कर रहे हैं जो बिना किसी अहंकार या देरी के उन्हें उनकी पसंद के विकल्प उपलब्ध करा रहा है।

‘ट्रंप की कार्यशैली सर्कस जैसी’

अपनी टिप्पणी के समापन में राम गोपाल वर्मा ने एक गंभीर सामाजिक सवाल भी उठाया। उन्होंने कहा कि एक तरफ दुनिया भर के माता-पिता और शिक्षक बच्चों को मर्यादित भाषा और संस्कारों का पाठ पढ़ाते हैं ताकि वे बड़े होकर सम्मानित नागरिक और नेता बनें। लेकिन जब दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश का राष्ट्रपति सार्वजनिक रूप से गालियों और अश्लील शब्दों का इस्तेमाल करता है, तो यह आने वाली पीढ़ी के लिए एक गलत उदाहरण पेश करता है।

राम गोपाल वर्मा ने चिंता जताई कि अगपर नेतृत्व का स्तर इस तरह गिर जाएगा, तो अभिभावक अपने बच्चों को मर्यादा और नैतिकता का महत्व कैसे समझा पाएंगे। उन्होंने ट्रंप की कार्यशैली को एक ‘सर्कस’ करार देते हुए कहा कि जब उपयोगकर्ता के पास सूचना को प्रोसेस करने का धैर्य न हो, तो एआई जैसी बुद्धिमत्ता भी केवल अराजकता ही पैदा करती है।

इसी बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर अब तक का सबसे कड़ा और विवादित अल्टीमेटम जारी किया है। एक साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ईरान समझौता नहीं करता है, तो वह वहां सब कुछ उड़ा देंगे। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर मंगलवार की समयसीमा तय करते हुए लिखा कि यह दिन ईरान के लिए पावर प्लांट डे और ब्रिज डे साबित होगा।

उन्होंने बेहद तल्ख और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए चेतावनी दी कि अगर होर्मुज स्ट्रेट तुरंत नहीं खोला गया, तो ईरानी नागरिक नर्क जैसी स्थितियों में रहने को मजबूर होंगे। पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की के माध्यम से चल रही परोक्ष बातचीत के बावजूद ट्रंप के इस सख्त रुख ने वैश्विक स्तर पर युद्ध के खतरों को बढ़ा दिया है।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments