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होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप की चेतावनी के बाद तेल की कीमतों में भारी उछाल

बाजार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड 1.4 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी के साथ 110.60 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जबकि अमेरिकी क्रूड में 1.8 प्रतिशत का उछाल देखा गया और यह 113.60 डॉलर के स्तर को छू गया है।

वाशिंगटन/तेहरानः पश्चिम एशिया में तनाव के खत्म होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। ईरान और अमेरिका फिलहाल पीछे हटते नहीं दिख रहे हैं। दोनों तरफ से हमले लगाता जारी हैं। इस संघर्ष के शुरू होने से होर्मुज स्ट्रेट भी बंद है जिसके चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार और आपूर्ति शृंखलाएं भारी दबाव में आ रही हैं।

सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा न खोलने की स्थिति में ईरानी ऊर्जा केंद्रों पर हमले की धमकी देने के बाद रविवार को कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी गई है। इस तनावपूर्ण स्थिति के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जहाजरानी मार्गों में से एक पर व्यवधान की आशंकाएं गहरी हो गई हैं, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ रहा है।

तेल की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी

बाजार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड 1.4 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी के साथ 110.60 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जबकि अमेरिकी क्रूड में 1.8 प्रतिशत का उछाल देखा गया और यह 113.60 डॉलर के स्तर को छू गया है। ईरान और ओमान के बीच स्थित यह जलमार्ग वैश्विक तेल व्यापार की जीवनरेखा माना जाता है। रविवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 111 डॉलर तक पहुंच गई। इस संघर्ष ने उन बाजारों को हिला दिया है जो पहले से ही आपूर्ति में व्यवधान के प्रति संवेदनशील हैं।

गौरतलब है कि दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, जिससे यह रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील चोकपॉइंट बन गया है। यहां होने वाली किसी भी हलचल का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर तत्काल और व्यापक प्रभाव पड़ता है।

समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित

मौजूदा गतिरोध ने समुद्री व्यापार के प्रवाह को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है। फॉक्स न्यूज के अनुसार, बहरीन के विदेश मंत्री ने चिंता जताई है कि ईरान द्वारा मार्ग बाधित किए जाने के कारण टैंकरों का आवागमन 90 प्रतिशत से अधिक कम हो गया है।

बहरीन के मंत्री ने कहा कि यह संकट अब केवल ऊर्जा बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्री व्यापार में व्यवधान आने से वैश्विक खाद्य सुरक्षा और उर्वरक आपूर्ति शृंखलाओं के लिए भी बड़ा खतरा पैदा हो गया है। मंत्री का मानना है कि यह स्थिति वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए एक गंभीर चुनौती बन गई है।

गैसोलीन की कीमत 4.11 डॉलर प्रति गैलन पहुंची

बाजार में जारी अस्थिरता का असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ने लगा है। संयुक्त राज्य अमेरिका में संघर्ष के कारण कच्चे तेल की बढ़ती लागत ने गैसोलीन की कीमतों को उछाल दिया है।

फॉक्स न्यूज के अनुसार, राष्ट्रीय औसत गैसोलीन की कीमत 4.11 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जो कुछ ही हफ्तों में हुई रिकॉर्ड वृद्धि है। इसके साथ ही जेट ईंधन की कीमतों में भी पिछले कई वर्षों की सबसे तेज बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। उद्योग जगत के आंकड़े बताते हैं कि जेट ईंधन की कीमतें कुछ ही हफ्तों में दोगुनी से अधिक हो गई हैं, जिससे एयरलाइनों की परिचालन लागत बढ़ेगी और भविष्य में हवाई किराए में बड़ी वृद्धि की संभावना है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस संकट ने उन वैश्विक वित्तीय बाजारों को हिलाकर रख दिया है जो पहले से ही आपूर्ति व्यवधान के प्रति संवेदनशील थे। ओपेक+ के सदस्यों ने भी ऊर्जा बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की है। हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर ओमान और पाकिस्तान जैसे देश मध्यस्थता की कोशिशों में जुटे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है।

सीएनएन ने एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के हवाले से बताया है कि जब तक ईरान को युद्ध क्षति के लिए मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक यह जलमार्ग अवरुद्ध रहेगा। इस अड़ियल रुख ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और अनिश्चितता को और अधिक बढ़ा दिया है।

आईएएनएस इनपुट के साथ

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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