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गैस की किल्लत से यूपी से लेकर दिल्ली, कर्नाटक, मुंबई तक मचा हाहाकार; तमिलनाडु में 1 लाख रेस्तरां के बंद होने की नौबत

उत्तर प्रदेश के कई शहरों में रसोई गैस (एलपीजी) की उपलब्धता को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि घटते स्टॉक को देखते हुए तेल कंपनियों ने अनौपचारिक तौर पर कमर्शियल गैस सिलेंडरों की डिलीवरी रोक दी है और गैस एजेंसियों को घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।

ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर गैस की किल्लत पैदा हो गई है। इसका सीधा असर भारत में देखने को मिल रहा है जहाँ केंद्र सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘डोमेस्टिक एलपीजी’ को प्राथमिकता पर रखने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति लगभग ठप हो गई है, जिससे देशभर में होटल और कैटरिंग उद्योग संकट में है।

उत्तर प्रदेश के कई शहरों में रसोई गैस (एलपीजी) की उपलब्धता को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि घटते स्टॉक को देखते हुए तेल कंपनियों ने अनौपचारिक तौर पर कमर्शियल गैस सिलेंडरों की डिलीवरी रोक दी है और गैस एजेंसियों को घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।

इस फैसले का सबसे ज्यादा असर होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों पर पड़ा है, जिन्हें अपने किचन चलाने के लिए कमर्शियल सिलेंडरों की जरूरत होती है। राज्य के कई शहरों में घरेलू सिलेंडरों की मांग भी अचानक बढ़ गई है। लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी और गोरखपुर जैसे मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों के साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रामपुर, अमरोहा, संभल, मेरठ, बिजनौर, शामली, बागपत और सहारनपुर में बुकिंग के चार-पांच दिन बाद भी सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो पा रही है। इसके कारण कई जगह गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।

गोरखपुर में गैस एजेंसी के बाहर कतार में खड़े लोगों का कहना है कि अचानक सिलेंडर लेना मुश्किल हो गया है और कुछ लोगों को दो-तीन दिन से लाइन में लगना पड़ रहा है। हालांकि अधिकारियों ने किसी बड़े संकट से इनकार किया है। लखनऊ के जिला आपूर्ति अधिकारी विजय प्रताप सिंह के अनुसार फिलहाल किसी तरह की कमी की स्थिति नहीं है और विभाग के पास अगले 25 दिनों के लिए पर्याप्त कोटा उपलब्ध है। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए कई एजेंसियों ने सिलेंडर की डिलीवरी अवधि भी बढ़ा दी है, जिससे पहले तीन-चार दिन में मिलने वाला सिलेंडर अब 25 से 30 दिन बाद मिलने की आशंका जताई जा रही है।

कर्नाटक के हुबली में कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति बंद

इस बीच कर्नाटक के हुबली में कमर्शियल ग्राहकों को गैस की डिलीवरी बंद कर दी गई है। हुबली गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के नेता सुरेशा ने आईएएनएस को बताया कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल किसी तरह की कमी नहीं है, लेकिन कमर्शियल ग्राहकों को गैस की डिलीवरी रोक दी गई है। इस फैसले का असर कैटरिंग और होटल कारोबार पर पड़ा है। हुबली कैटरिंग एसोसिएशन के प्रमुख रत्नाकर शेट्टी ने कहा कि अचानक गैस सप्लाई बंद होने से कारोबार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि उनके साथ करीब 150 लोग काम करते हैं और सभी की आजीविका इसी व्यवसाय पर निर्भर है।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि अगर स्थिति ऐसी ही रही तो देशभर में दाम बढ़ सकते हैं। उनके मुताबिक गैस की कमी के कारण कई होटल बंद करने की नौबत आ सकती है और लोग मजबूरी में लकड़ी, इलेक्ट्रिक या केरोसिन स्टोव का सहारा लेने लगेंगे।

इस बीच देश की राजधानी दिल्ली में भी गैस सिलेंडर को लेकर मारामारी मची है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में कई एजेंसियों ने बताया कि नए नियम के कारण सिस्टम कई बार बुकिंग स्लिप जनरेट नहीं कर पा रहा है, जिससे ग्राहकों को सिलेंडर देने में दिक्कत आ रही है।

नए बुकिंग नियम से परेशान दिल्लीवासी

मध्य दिल्ली के झंडेवालान मंदिर के पास स्थित जनता मार्केट की एक गैस एजेंसी के प्रतिनिधि ने बताया कि कुछ ग्राहकों ने तीन-चार दिन पहले ही बुकिंग करा दी थी, लेकिन 25 दिन के नियम के कारण उन्हें सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। वहीं पश्चिमी दिल्ली के कुछ इलाकों में एजेंसियों ने मंगलवार को सप्लाई न मिलने की भी जानकारी दी। किर्ती नगर की एक एजेंसी के स्टोर कीपर अविनाश पांडे ने बताया कि आमतौर पर उन्हें हर दिन हरियाणा से करीब 350 सिलेंडर मिलते हैं, लेकिन मंगलवार को कोई सप्लाई नहीं पहुंची। हालांकि सोमवार के बचे हुए स्टॉक से काम चलाया गया।

दिल्ली में गैस एजेंसियों का कहना है कि घरेलू ग्राहकों के बीच सिलेंडर बुकिंग में अचानक तेजी आई है। विकसपुरी की एक एजेंसी की मैनेजर गीतांजलि के अनुसार, घरेलू उपभोक्ता एक से अधिक सिलेंडर लेने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन नियमों के कारण ऐसा संभव नहीं है। कुछ जगहों पर कालाबाजारी की खबरें भी सामने आई हैं, जहां सिलेंडर लगभग दोगुनी कीमत पर बिकने की बात कही जा रही है। नई फ्रेंड्स कॉलोनी के एक चाय विक्रेता के मुताबिक, सिलेंडर की कीमत 1,100 रुपये से बढ़कर करीब 2,000 रुपये तक पहुंच गई है।

कई जगहों पर कमर्शियल ग्राहकों के लिए गैस सप्लाई अस्थायी रूप से रोक दी गई है, जिससे होटल और रेस्टोरेंट कारोबार प्रभावित हो रहा है। दिल्ली के कनॉट प्लेस जैसे इलाकों में, जहां पाइप्ड गैस की सुविधा नहीं है, रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि सिलेंडर की सीमित उपलब्धता के कारण गैस ज्यादा खपत वाले व्यंजन बनाना मुश्किल हो रहा है।

छत्तीसगढ़ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने जारी की एडवाइजरी

इधर छत्तीसगढ़ में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कमी की खबरों के बीच छत्तीसगढ़ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने अपने सदस्यों के लिए एडवायजरी जारी की है। इसमें होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबारियों से पैनिक बाइंग से बचने और सिलेंडर जमा न करने की अपील की गई है। एसोसिएशन ने कहा है कि ऐसी स्थिति में जरूरी किचन ऑपरेशन, मुख्य मेन्यू आइटम और पहले से तय बैंक्वेट कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही जरूरत पड़ने पर इंडक्शन कुकटॉप, इलेक्ट्रिक हॉट प्लेट, इलेक्ट्रिक राइस कुकर और इलेक्ट्रिक केटल जैसे उपकरणों के इस्तेमाल की सलाह दी गई है।

हालांकि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। उन्होंने अधिकारियों को गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने, स्टॉक की निगरानी करने और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों से बचें और जरूरत के अनुसार ही गैस बुक करें।

गैस सिलेंडर की कमी का मुंबई में महालक्ष्मी धोबी घाट पर भी असर

इस बीच, गैस आपूर्ति की कमी का असर अब मुंबई के पारंपरिक धंधों तक भी पहुंचने लगा है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान–इजराइल संघर्ष के कारण कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई में आई बाधा का असर मुंबई के मशहूर धोबी घाटों पर भी दिखाई देने लगा है। शहर के कई बड़े लॉन्ड्री केंद्रों, खासकर 136 साल पुराने महालक्ष्मी धोबी घाट में कामकाज प्रभावित हुआ है, क्योंकि यहां कपड़े सुखाने वाली मशीनें एलपीजी सिलेंडर से चलती हैं और सिलेंडर की उपलब्धता घटने लगी है।

रिपोर्ट के अनुसार, महालक्ष्मी धोबी घाट को दुनिया का सबसे बड़ा ओपन-एयर लॉन्ड्रोमैट माना जाता है। वर्ष 1890 में बने इस परिसर में 731 पुराने वॉशिंग स्टोन हैं और यहां रोज़ाना एक लाख से अधिक कपड़े धोने, सुखाने और इस्त्री करने का काम होता है। बदलते समय के साथ कई धोबी अब वॉशिंग मशीन और ड्रायर का इस्तेमाल करने लगे हैं, लेकिन इन ड्रायर मशीनों को चलाने के लिए एलपीजी सिलेंडर ही मुख्य ईंधन है, क्योंकि वहां अभी पाइप्ड गैस लाइन उपलब्ध नहीं है।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में धोबी कल्याण एवं औद्योगिक विकास सहकारी संस्था के चेयरमैन संतोष कनोेजिया ने बताया कि महालक्ष्मी धोबी घाट के 731 धोबियों में से करीब आधे से ज्यादा लोग ड्रायर मशीनों पर निर्भर हैं और हर धोबी रोजाना एक से दो सिलेंडर तक इस्तेमाल करता है। मौजूदा स्थिति में कई लोगों को ब्लैक मार्केट से महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं, जिससे लागत बढ़ गई है और कामकाज प्रभावित हो रहा है। इसी तरह कोलाबा और ताड़देव के धोबी घाटों में भी पिछले कुछ दिनों से सिलेंडर जुटाने में दिक्कतें सामने आ रही हैं।

तमिलनाडु में भी गहराया संकट, एक लाख रेस्तरां बंद होने की आशंका

इसी तरह तमिलनाडु में भी व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की कमी से होटल और रेस्तरां उद्योग पर गंभीर असर पड़ने लगा है। आईएएनएस के मुताबिक, तमिलनाडु होटल ओनर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर गैस आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई तो अगले दो दिनों के भीतर राज्यभर में करीब एक लाख रेस्तरां बंद होने की नौबत आ सकती है। एसोसिएशन के अध्यक्ष एम. वेंकटसुब्बू ने कहा कि व्यावसायिक खाना पकाने की गैस की आपूर्ति बाधित होने से कई जिलों में रेस्तरां पहले ही प्रभावित होने लगे हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 50 लाख लोग सीधे तौर पर रेस्तरां उद्योग से जुड़े हैं, जबकि करीब इतने ही लोग अप्रत्यक्ष रूप से इस क्षेत्र पर निर्भर हैं। ऐसे में गैस की कमी जारी रही तो पूरे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। तिरुची, पुदुक्कोट्टई, तंजावुर, करूर, पेरम्बालूर और अरियालूर जैसे जिलों के कई रेस्तरां मालिकों का कहना है कि उनके पास व्यावसायिक सिलेंडरों का स्टॉक केवल दो दिनों के लिए ही बचा है, क्योंकि इन इलाकों में सप्लाई ट्रक नहीं पहुंच पाए हैं।

कुछ शहरों में हालात को देखते हुए रेस्तरां संचालकों ने गैस बचाने के लिए मेन्यू सीमित कर दिया है और संचालन के घंटे भी घटा दिए हैं। कोयंबटूर, मदुरै, रामनाथपुरम और दिंडीगुल समेत कई जिलों में कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित बताई जा रही है। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।

सरकार ने वैकल्पिक सप्लाई बढ़ाई, घरेलू उत्पादन में भी इजाफा

इस बीच सरकार ने बढ़ती चिंता के बीच गैस आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। आईएएनएस के अनुसार, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण सप्लाई में आई बाधाओं के बीच भारत ने वैकल्पिक मार्गों और स्रोतों से एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति सुनिश्चित की है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इन वैकल्पिक स्रोतों से आने वाली गैस की खेप जल्द ही देश पहुंचने की संभावना है।

सरकार के निर्देश के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने भी कुकिंग गैस के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना शुरू कर दिया है। बताया गया है कि देश में एलपीजी का उत्पादन करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के जामनगर स्थित रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में एलपीजी उत्पादन को अधिकतम स्तर तक बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कंपनी ने कहा है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बावजूद भारतीय घरों के लिए आवश्यक ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना राष्ट्रीय प्राथमिकता है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी भरोसा दिलाया है कि भारत ने पश्चिम एशिया के बाहर से भी ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता बढ़ाई है, जिससे देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि घरेलू उपभोक्ताओं को सीएनजी और पीएनजी की पर्याप्त आपूर्ति मिलती रहे और उद्योगों को भी उनकी गैस जरूरतों का लगभग 70 से 80 प्रतिशत तक उपलब्ध कराया जा रहा है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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