Monday, April 6, 2026
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अमेरिका के बर्कले यूनिवर्सिटी से 6 दिन से लापता छात्र साकेत श्रीनिवासैया का मिला शव, भारतीय दूतावास ने क्या कहा?

साकेत एक अत्यंत प्रतिभाशाली छात्र थे। उन्होंने साल 2025 में देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी मद्रास से केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया था। फिलहाल वह यूसी बर्कले से केमिकल एंड बायोमॉलिक्यूलर इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री ले रहे थे।

सैन फ्रांसिस्को: अमेरिका के कैलिफोर्निया में पिछले एक हफ्ते से लापता भारतीय छात्र साकेत श्रीनिवासैया की मौत हो गई है। सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि स्थानीय पुलिस ने साकेत का शव बरामद कर लिया है। साकेत मूल रूप से कर्नाटक के तुमकुरु के रहने वाले थे।

वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में कहा कि लापता भारतीय छात्र का शव मिलने की जानकारी अत्यंत दुखद है और इस कठिन समय में उसकी परिवारजनों और प्रियजनों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की गई हैं। दूतावास ने बताया कि वह स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय और पार्थिव शरीर को जल्द भारत लाने की व्यवस्था सहित आवश्यक औपचारिकताओं में परिवार की सहायता के लिए तैयार है। अधिकारियों का परिवार से सीधा संपर्क बना हुआ है।

कैलिफोर्निया में झील के पास आखिरी बार देखा गया

साकेत श्रीनिवासैया कर्नाटक के तुमकुरु के रहने वाले थे। वे कैलिफोर्निया के टिल्डन रीजनल पार्क स्थित एक झील के पास आखिरी बार देखे गए थे। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उनका बैकपैक, जिसमें पासपोर्ट और लैपटॉप थे, इलाके के एक घर के दरवाजे पर मिला था। उनके लापता होने को लेकर दूतावास ने पहले चिंता जताई थी और स्थानीय पुलिस से संपर्क बनाए रखा था।

साकेत के पिता ने बताया था कि 9 फरवरी को उनकी आखिरी बार बेटे से बात हुई थी। बाद में संपर्क नहीं हो पाने पर रूममेट्स ने उसकी तलाश की और फिर बर्कले पुलिस विभाग में शिकायत दर्ज कराई गई। साकेत के माता-पिता ने 13 फरवरी को कर्नाटक सरकार से मदद की अपील भी की थी। इसके बाद राज्य सरकार ने विदेश मंत्रालय से आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।

मद्रास आईआईटी के मेधावी छात्र रहे थे साकेत

साकेत श्रीनिवासैया यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले में मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे थे। उन्होंने 2025 में आईआईटी मद्रास से केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया था और इसके बाद अमेरिका में उच्च शिक्षा ले रहे थे। उनके प्रोफाइल के अनुसार वे हाइपरलूप के लिए माइक्रोचैनल कूलिंग सिस्टम से जुड़े एक पेटेंट में सह-आविष्कारक भी थे। स्कूली शिक्षा उन्होंने बेंगलुरु के श्री वाणी एजुकेशन सेंटर से प्राप्त की थी। उन्हें तेज बुद्धि, विनम्रता और समर्पण के लिए जाना जाता था।

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब विदेशों, विशेषकर अमेरिका में भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। हाल ही में लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय दूतावास और मिशन अपने अधिकार क्षेत्र में पढ़ने वाले छात्रों से नियमित संपर्क बनाए रखते हैं। साथ ही विदेश जाने पर उन्हें संभावित चुनौतियों और सावधानियों के बारे में जानकारी देने के लिए ओरिएंटेशन सत्र और समय-समय पर एडवाइजरी जारी की जाती हैं।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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