Homeविश्वहांगकांग मीडिया मुगल जिमी लाई को 20 साल की जेल, दुनियाभर से कैसी...

हांगकांग मीडिया मुगल जिमी लाई को 20 साल की जेल, दुनियाभर से कैसी आ रही प्रतिक्रिया?

अदालत ने ब्रिटिश नागरिक लाई को 2019 से 2021 के बीच एप्पल डेली में प्रकाशित 161 लेखों से जुड़े मामलों में दोषी माना। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि इन लेखों के जरिए सरकार के खिलाफ असंतोष भड़काया गया और लाई ने अपने मीडिया मंच और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक संपर्कों का इस्तेमाल कर चीन और हॉन्गकॉन्ग पर प्रतिबंध लगवाने के लिए विदेशी सरकारों पर दबाव बनाने की कोशिश की।

हांगकांग की एक अदालत ने लोकतंत्र समर्थक मीडिया कारोबारी और एप्पल डेली अखबार के संस्थापक जिमी लाई को विदेशी ताकतों से मिलीभगत और राजद्रोह के मामलों में 20 साल की सजा सुनाई है। यह फैसला बीजिंग द्वारा लागू राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत अब तक की सबसे कड़ी सजा मानी जा रही है। और इसके साथ ही लगभग पांच साल से चल रही कानूनी प्रक्रिया का अंत भी हो गया है।

चीन ने 2020 में हांगकांग में बड़े पैमाने पर हुए लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसएल) लागू किया था। चीनी प्रशासन का दावा था कि यह कानून अशांति को खत्म करने और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। इसी कानून के तहत जिमी लाई को 2020 में गिरफ्तार किया था और वर्ष 2025 में उन्हें दोषी ठहराया गया।

अदालत के न्यायाधीशों ने अपने फैसले में कहा कि लाई का आपराधिक आचरण गंभीर और अत्यंत गंभीर है, इसलिए कुल 20 साल की सजा उचित है। हालांकि, इसमें से दो साल उनकी पहले से चल रही सजा के साथ समानांतर चलेंगे, यानी उन्हें अतिरिक्त 18 साल जेल में बिताने होंगे।

क्या मामला?

अदालत ने ब्रिटिश नागरिक लाई को 2019 से 2021 के बीच एप्पल डेली में प्रकाशित 161 लेखों से जुड़े मामलों में दोषी माना। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि इन लेखों के जरिए सरकार के खिलाफ असंतोष भड़काया गया और लाई ने अपने मीडिया मंच और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक संपर्कों का इस्तेमाल कर चीन और हांगकांग पर प्रतिबंध लगवाने के लिए विदेशी सरकारों पर दबाव बनाने की कोशिश की। अदालत ने उन्हें इन गतिविधियों का मास्टरमाइंड करार दिया।

जिमी लाई ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए खुद को राजनीतिक कैदी बताया था और कहा था कि उन्हें बीजिंग के इशारे पर प्रताड़ित किया जा रहा है। उनके परिवार ने इस सजा को क्रूर और अमानवीय करार दिया है। उनके बेटे सेबेस्टियन लाई ने कहा कि यह सजा उनके पिता के लिए जानलेवा साबित हो सकती है, जबकि बेटी क्लेयर लाई ने आशंका जताई कि यदि सजा पूरी तरह लागू की गई तो उनके पिता जेल में ही दम तोड़ सकते हैं।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब जिमी लाई का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाता रहा है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने पिछले महीने बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के दौरान लाई की रिहाई की मांग की थी। इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अक्टूबर में शी जिनपिंग के साथ बैठक में यह मुद्दा उठा चुके हैं।

जिमी लाई की सजा पर दुनियाभर से कैसी आ रही प्रतिक्रिया

हांगकांग के मुख्य कार्यकारी जॉन ली ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि लाई के अपराध बेहद घृणित हैं और 20 साल की सजा कानून के राज और न्याय को दर्शाती है। वहीं चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि लाई चीनी नागरिक हैं और हांगकांग में चीन विरोधी गतिविधियों में प्रमुख भूमिका निभा चुके हैं। उन्होंने इसे “कानूनी, वैध और उचित” फैसला बताया।

दूसरी ओर, इस सजा की दुनिया भर में आलोचना हुई है। ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने इसे करीब आजीवन कारावास करार देते हुए मानवीय आधार पर लाई की रिहाई की मांग दोहराई। यूरोपीय संघ ने फैसले की निंदा करते हुए हांगकांग में प्रेस स्वतंत्रता बहाल करने और पत्रकारों पर मुकदमे बंद करने की अपील की।

ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने चीन से अभिव्यक्ति, मीडिया और नागरिक स्वतंत्रताओं के दमन को रोकने और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को रद्द करने का आग्रह किया। ताइवान के मेनलैंड अफेयर्स काउंसिल ने कहा कि यह फैसला अभिव्यक्ति की आजादी पर गहरा ठंडा असर डालने वाला है और हांगकांग के दर्दनाक अनुभव से सीख लेने की जरूरत है।

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने इसे प्रेस स्वतंत्रता के पतन की संज्ञा दी, जबकि ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि 78 वर्षीय जिमी लाई के लिए 20 साल की सजा व्यावहारिक रूप से मौत की सजा के समान है। वहीं हांगकांग विश्वविद्यालय के कानून विशेषज्ञ साइमन यंग ने सजा को “कुछ मामलों में जरूरत से ज्यादा सख्त” बताया और इसके खिलाफ अपील की संभावना जताई।

author avatar
अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
Anil Sharma, Anil Anuj, Anil anuj articles, bole bharat, बोले भारत, अनिल शर्मा, अनिल अनुज,
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular