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‘फैसला आने के बाद ही जान देने को मन हुआ’, उन्नाव रेप केस में कुलदीप सेंगर को जमानत मिलने के बाद पीड़िता और उसकी माँ ने क्या कुछ कहा?

2017 के उन्नाव रेप केस में दोषी पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार जमानत दे दी। अदालत के इस फैसले के बाद न्याय की आस लगाए बैठी पीड़िता और उसके परिवार को गहरे सदमे में हैं।

मंगलवार को जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने सेंगर की सजा को अपील पर सुनवाई पूरी होने तक निलंबित कर दिया। डिवीजन बेंच ने 15 लाख रुपये के बॉन्ड पर जमानत दी है। इससे पहले सीबीआई कोर्ट ने सेंगर को नाबालिग से रेप के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

हालांकि सेंगर फिलहाल जेल से बाहर नहीं आएगा, क्योंकि पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत से जुड़े मामले में उसे 10 साल की सजा मिली है। इस मामले में उसकी अपील और सजा निलंबन की अर्जी अभी हाईकोर्ट में लंबित है जिसपर 28 दिसंबर को सुनवाई होनी है।

पीड़िता और उसके परिवार ने क्या कहा?

अदालत जब मामले की सुनवाई कर रही थी, पीड़िता बाहर ही मौजूद थी। जैसी ही सेंगर की जमानत की खबर मिली वह फूटकर रोने लगी। कोर्ट द्वारा जमानत देने के फैसले के चंद घंटों बाद ही पीड़िता, अपनी माँ और सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना के साथ इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गई।

अपनी सुरक्षा को लेकर आतंकित पीड़िता ने रुंधे गले से कहा कि जब उसने इस फैसले के बारे में सुना, तो उसका मन उसी क्षण जान देने का हुआ, लेकिन अपने परिवार की बेबसी को याद कर उसने खुद को रोक लिया। पीड़िता का आरोप है कि इस फैसले ने न केवल उसे असुरक्षित महसूस कराया है, बल्कि पूरे सिस्टम से उसका भरोसा भी डगमगा गया है। उसने यह आरोप लगाया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को देखते हुए सेंगर को जमानत दी गई है।

पीड़िता का आरोप है कि उसे इंडिया गेट पर धरना देने नहीं दिया गया। पुलिस ने उसे जबर वहां से उठा दिया, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आई है। पुलिस की कार्रवाई पर पीड़िता ने बताया कि उसके पूरे शरीर पर हादसों और हमलों के 250 टांके हैं और शरीर के भीतर लोहे की रॉड लगी हुई है, इसके बावजूद महिला पुलिसकर्मियों ने उसे बेहद बेरहमी से घसीटा और बस में पटक दिया।

पीड़िता की माँ ने रोते हुए कहा कि वे यहाँ केवल अपनी जान की भीख मांगने आए थे, क्योंकि सेंगर के बाहर आने का मतलब है उनके पूरे परिवार की मौत का वारंट। उन्होंने भावुक होकर कहा कि अगर अपराधी को बाहर आना ही था, तो बेहतर होता कि हमें भी जेल में डाल दिया जाता, ताकि कम से कम हम जिंदा तो रहते।

सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी पीड़िता

पीड़िता ने इस अदालती राहत को सीधे तौर पर राजनीति से जोड़ते हुए इसे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारी बताया। उसने सवाल उठाया कि जिस मामले में बहस महीनों पहले पूरी हो चुकी थी, उसका फैसला तीन महीने तक क्यों रोका गया? पीड़िता का आरोप है कि भाजपा के पूर्व नेता होने के नाते सेंगर को यह ‘सेटलमेंट’ के तहत राहत दी गई है।

पीड़िता ने कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का इरादा रखती हैं। उसने कहा, मुझे सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है। मुझे उम्मीद है कि वहां मुझे न्याय मिलेगा। उसने यह भी जोड़ा कि अगर वहां से भी इंसाफ नहीं मिलता, तो उन्हें विश्वास है कि जनता आखिरकार न्याय दिलाने का काम करेगी।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि कुलदीप सिंह सेंगर के इशारे पर पुलिस और प्रशासन काम करते रहे हैं। उनका कहना है कि जेल में रहते हुए भी सेंगर ने गवाह वीरेंद्र यादव पर गुंडा एक्ट लगवाया। उसने आरोप लगाया, गिरफ्तारी के बाद वीरेंद्र यादव को 50 दिन तक जेल में रखा गया, जहां उसके साथ लगातार प्रताड़ना की गई।

‘सेंगर को जमानत, मेरे चाचा को नहीं’

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए पीड़िता ने कहा कि सेंगर को ऐसे समय जमानत दी गई, जब अदालतों की एक हफ्ते की छुट्टियां शुरू होने वाली हैं। उन्होंने तुलना करते हुए कहा, “मेरे चाचा ने न किसी बेटी को छुआ, न किसी के साथ गलत किया, फिर भी वे सालों से जेल में हैं। न उन्हें जमानत मिल रही है और न ही पेरोल। दूसरी तरफ, रेप करने और हत्या की साजिश रचने वाले कुलदीप सेंगर को जमानत मिल रही है।”

पीड़िता ने यह आरोप भी लगाया कि बृजभूषण शरण सिंह से जुड़े मामले में कुलदीप सेंगर पूरा सहयोग कर रहे हैं, जिससे उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिलने का संदेह और गहरा होता है। वहीं, पीड़िता की बहन ने भी दावा किया कि सेंगर को राहत मिलते ही उनके घर के पास अज्ञात लोग मंडराने लगे हैं और परिवार को धमकियां मिल रही हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने भी न्याय व्यवस्था के इस चेहरे पर प्रहार करते हुए कहा कि भारत में रसूखदार बलात्कारियों को उम्रकैद के बाद भी राहत मिल सकती है, लेकिन पीड़ितों को केवल तारीखें और मानसिक प्रताड़ना ही नसीब होती है।

योगिता भयान ने न्याय व्यवस्था पर उठाए सवाल

अदालत के फैसले के बाद महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयान ने अपने एक्स पर एक बाद एक कई पोस्ट में इसपर खासा नाराजगी जाहिर की। उन्होंने लिखा, वाह रे देश का कानून। यही देश का न्याय है। कैसे बचाएंगे देश की बच्चियों को कैसे मिलेगा न्याय! ये बच्ची उन्नाव गैंगरेप की पीड़िता है दरिंदगी के बाद पिता की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई कार एक्सीडेंट में बुआ और वकील की मौत हो गई 100 से ज़्यादा टाके पड़े, कई हड्डियाँ टूटी वेंटीलेटर पर रही 6 महीने के इलाज के बाद जान बची और अब…. यह कैसा न्याय है ??? पीड़िता न्याय के लिए रो रही है – कह रही है आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा आज कुलदीप सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से रेप के मामले में जमानत मिली और उम्र क़ैद की

योगिता भयान ने कहा, “निश्चित रूप से हमारी मांग यही है कि उस लड़की के साथ घोर अन्याय हुआ है। मेरा मानना है कि सिर्फ उसके साथ नहीं, बल्कि हर उस महिला और हर उस पीड़ित के साथ अन्याय हुआ है जो न्याय की आस लगाए बैठा है। इस मामले में इससे बड़ा अन्याय कुछ हो ही नहीं सकता।”

उन्होंने सवाल उठाया कि शुरुआत से ही जिन लोगों ने लगातार मुश्किलें झेली हैं, उन्हें अब और क्यों सताया जा रहा है। उन्होंने कहा, “वे शुरू से संघर्ष करते आए हैं। आज अचानक ऐसा क्या बदल गया कि आरोपी को जमानत दे दी गई?”

योगिता भयान ने कहा कि इस तरह के फैसले महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा करते हैं और न्याय व्यवस्था पर भरोसे को कमजोर करते हैं।

किन शर्तों पर सेंगर को मिली जमानत

दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत देते हुए सख्त शर्तें लगाई हैं। अदालत ने जमानत के लिए 15 लाख रुपये का मुचलका भरने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत के दोषसिद्धि आदेश के खिलाफ दाखिल अपील पर फैसला आने तक यह जमानत प्रभावी रहेगी।

हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक को निर्देश दिया है कि वह पीड़िता के पांच किलोमीटर के दायरे में नहीं जाएगा और जमानत अवधि के दौरान दिल्ली में ही रहेगा। इसके अलावा उसे हर सोमवार संबंधित पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगानी होगी। हालांकि पीड़िता ने कहा कि सेंगर नहीं, उसके आदमी तो आ सकते हैं?

अदालत ने यह भी शर्त रखी है कि कुलदीप सेंगर अपना पासपोर्ट निचली अदालत में जमा करेगा और पीड़िता या उसके परिवार को किसी भी तरह से धमकाने या प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेगा। हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि अगर किसी भी शर्त का उल्लंघन हुआ, तो जमानत तुरंत रद्द कर दी जाएगी।

गौरतलब है कि कुलदीप सिंह सेंगर ने 2002 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर उन्नाव सदर सीट से पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। यह जीत इसलिए भी खास मानी गई, क्योंकि इससे पहले बसपा कभी इस सीट पर चुनाव नहीं जीत पाई थी। हालांकि दबंगई और लगातार विवादों के चलते बाद में बसपा ने उसे पार्टी से बाहर कर दिया।

इसके बाद 2007 में समाजवादी पार्टी ने उसे टिकट दिया। सेंगर ने बांगरमऊ सीट से चुनाव लड़ा और विधायक बना। 2012 में उसने सीट बदलकर भगवंतनगर से चुनाव जीता, लेकिन 2016 में समाजवादी पार्टी ने भी उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बावजूद उसका राजनीतिक असर बना रहा और उसने अपनी पत्नी संगीता सिंह को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जिला पंचायत अध्यक्ष बनवा दिया, जिससे उसके रसूख का अंदाजा लगाया जाता है।

2017 में भारतीय जनता पार्टी ने कुलदीप सिंह सेंगर को बांगरमऊ से टिकट दिया और वह एक बार फिर विधायक चुना गया। इस तरह सेंगर का राजनीतिक सफर अलग-अलग दलों के जरिए आगे बढ़ता रहा, भले ही उसके साथ विवाद लगातार जुड़े रहे।

उन्नाव रेप केस की पूरी टाइमलाइन

2017: वारदात

  • 4 जून 2017: एक नाबालिग लड़की नौकरी की मांग लेकर उन्नाव के तत्कालीन बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के आवास पर गई, जहाँ उसके साथ बलात्कार किया गया।
  • 11 जून – 20 जून 2017: पीड़िता को माखी गांव से तीन लोगों—शुभम सिंह, बृजेश यादव और अवध नारायण—द्वारा अपहरण किया गया। आरोप है कि उसे नशीला पदार्थ देकर कई दिनों तक सामूहिक बलात्कार किया गया।
  • 20 जून 2017: पीड़िता और उसके पिता ने अपहरण और बलात्कार की धाराओं के तहत इन तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।
  • 22 जून 2017: मेडिकल जांच में देरी के बाद पीड़िता को सुरक्षा के लिए दिल्ली भेजा गया।
  • अगस्त 2017: पीड़िता उन्नाव लौटी और विधायक सेंगर के खिलाफ नामजद एफआईआर की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने विधायक का नाम लेने से रोका।

2018: पिता की मौत और सीबीआई जांच

  • फरवरी 2018: विधायक का नाम एफआईआर में शामिल कराने के लिए पीड़िता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
  • 3 अप्रैल 2018: सेंगर के लोगों ने पीड़िता के पिता पर हमला किया। उल्टा पुलिस ने पिता के खिलाफ ही शिकायत दर्ज कर ली।
  • 5 अप्रैल 2018: विधायक के पक्ष की शिकायत पर पुलिस ने पीड़िता के पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
  • 8 अप्रैल 2018: न्याय न मिलता देख पीड़िता ने मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह का प्रयास किया।
  • 9 अप्रैल 2018: पुलिस हिरासत में पीड़िता के पिता की मौत हो गई। पोस्टमार्टम में उनके शरीर पर चोट के 14 निशान मिले।
  • 10 अप्रैल 2018: बढ़ते दबाव के बाद विधायक के भाई अतुल सेंगर को गिरफ्तार किया गया और एसआईटी गठित हुई।
  • 12-13 अप्रैल 2018: केस सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई ने विधायक कुलदीप सेंगर को हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
  • 18 अप्रैल 2018: पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराए। इसी दौरान मामले के एक अहम गवाह यूनुस की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई।

2019: सेंगर को उम्रकैद

  • मई 2019: लोकसभा चुनाव जीतने के बाद सांसद साक्षी महाराज जेल में बंद सेंगर से मिलने पहुंचे, जिससे विवाद खड़ा हुआ।
  • 28 जुलाई 2019: रायबरेली जाते समय पीड़िता की कार को एक ट्रक ने जोरदार टक्कर मारी। हादसे में पीड़िता की दो मौसियों की मौत हो गई, जबकि पीड़िता और वकील गंभीर रूप से घायल हुए।
  • 29 जुलाई 2019: इस सड़क दुर्घटना को हत्या की साजिश मानते हुए सेंगर और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
  • 1 अगस्त 2019: सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस मामले से जुड़े सभी पांच केस उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर करने का आदेश दिया।
  • 20 दिसंबर 2019: दिल्ली की अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर को आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

2025: हाईकोर्ट ने दी जमानत

  • 23 दिसंबर 2025: दिल्ली उच्च न्यायालय की बेंच ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए, अपील लंबित रहने तक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा को निलंबित कर दिया और उसे जमानत दे दी।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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