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बीबीसी की मोदी पर डॉक्युमेंट्री मामले में स्थगन की मांग पर दिल्ली हाई कोर्ट ने एनजीओ को लगाई फटकार, आखिरी मौका दिया

बीबीसी की पीएम मोदी पर बनाई गई डॉक्युमेंट्री मामले में स्थगन की बार-बार मांग को लेकर एनजीओ को फटकार लगाई है।

नई दिल्लीः दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार, 2 दिसंबर को पीएम मोदी पर एक डॉक्युमेंट्री के लिए बीबीसी पर 10,000 करोड़ रुपये के मानहानि मामले में बार-बार स्थगन की मांग को लेकर गुजरात स्थित एनजीओ जस्टिस ऑन ट्रॉयल को फटकार लगाई है।

जस्टिस अमित बंसल ने कहा कि यह मामला 2023 में दायर किया गया था और न्यायालय ने मामले की सुनवाई पर सवाल उठाए थे। हालांकि तब से वादी ने बार-बार स्थगन की मांग की है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने कहा कि वह वादी को यह तर्क देने का अंतिम अवसर देगा कि मामला किस प्रकार स्वीकार्य है। अदालत ने अपने आदेश में कहा, “हमने देखा है कि पिछली कई तारीखों से बार-बार स्थगन लिया जा रहा है। सुनवाई की स्थिरता पर विचार करने के लिए अंतिम अवसर दिया जाता है।”

एनजीओ की ओर से उपस्थित वकील ने कहा कि स्थगन इसलिए मांगा गया क्योंकि वे एक वरिष्ठ व्यक्ति को नियुक्त करने की प्रक्रिया में हैं।

अदालत ने अंततः कहा कि वह इस मामले की सुनवाई अप्रैल में करेगा। अदालत में दायर किए गए मुकदमे में जस्टिस ऑन ट्रॉयल ने तर्क दिया है कि बीबीसी की दो भागों वाली डॉक्युमेंट्री ‘इंडियाः द मोदी क्वेश्चन’ ने भारत, इसकी न्यायपालिका और प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा पर कलंक लगाया है।

आईपीए पर विचार कर रही अदालत

मौजूदा समय में अदालत एनजीओ के निर्धन व्यक्ति आवेदन (आईपीए) पर विचार कर रहा है। सिविल प्रक्रिया संहिता का आदेश 33 निर्धन व्यक्तियों द्वारा वाद दायर करने से संबंधित है। इसमें कहा गया है कि यदि किसी निर्धन व्यक्ति के पास ऐसे वाद में वाद के लिए कानून द्वारा निर्धारित शुल्क का भुगतान करने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं, तो वह वाद दायर कर सकता है।

इस मामले में जस्टिस ऑन ट्रायल ने बीबीसी से 10,000 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने मई 2023 में आईपीए को नोटिस जारी किया था।

बीबीसी ने 2023 में पीएम मोदी पर डॉक्युमेंट्री बनाई थी। डॉक्युमेंट्री का पहला पार्ट 17 जनवरी 2023 को और दूसरा पार्ट 24 जनवरी 2023 को प्रसारित हुआ था। फिल्म की स्क्रीनिंग को लेकर कई जगह माहौल तनावपूर्ण हो गया था। दिल्ली स्थित जेएनयू और जामिया में इसकी स्क्रीनिंग को लेकर तैयारी की गई थी जिस पर छात्रों को हिरासत में लिया गया था।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था कि यह एक प्रोपेगेंडा पीस है और इसका मकसद एक नैरेटिव पेश करना है जिसे लोग पहले ही खारिज कर चुके हैं।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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