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महाराष्ट्र डॉक्टर सुसाइड केसः चचेरे भाई ने मृतका के पोस्टमार्टम में चूक के साथ एक और सुसाइट नोट होने का किया दावा

बीते गुरुवार (23 अक्टूबर) को फलटण सिविल अस्पताल में पदस्थ महिला डॉक्टर ने सतारा के एक होटल में जाकर आत्महत्या कर ली थी। मौके से मिले चार पन्नों के सुसाइड नोट में डॉक्टर ने पुलिस सब-इंस्पेक्टर गोपाल बदने पर चार बार बलात्कार करने और मकान मालिक के बेटे प्रशांत बंकर पर मानसिक उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया है।

महाराष्ट्र के सतारा में आत्महत्या करने वाली महिला डॉक्टर के चचेरे भाई ने नया दावा किया है। आत्महत्या के बाद बलात्कार और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हेराफेरी करने के दबाव सहित आरोप लगाए हैं। साथ ही उसने एक और सुसाइड नोट की संभावना भी जताई है।

बीते गुरुवार (23 अक्टूबर) को फलटण सिविल अस्पताल में पदस्थ महिला डॉक्टर ने सतारा के एक होटल में जाकर आत्महत्या कर ली थी। मौके से मिले चार पन्नों के सुसाइड नोट में डॉक्टर ने पुलिस सब-इंस्पेक्टर गोपाल बदने पर चार बार बलात्कार करने और मकान मालिक के बेटे प्रशांत बंकर पर मानसिक उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया है। हालांकि, बंकर के परिवार ने दावा किया कि डॉक्टर ने उसका नाम इसलिए लिखा क्योंकि उसने शादी से इनकार कर दिया था।

सुसाइड नोट में डॉक्टर ने यह भी लिखा कि एक सांसद और उसके दो निजी सहायकों ने उस पर कई मामलों में आरोपियों के लिए फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने का दबाव बनाया। उसने बताया कि इस दबाव और उत्पीड़न के बावजूद उसने 21 बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी।

नोट में डॉक्टर ने एक घटना का जिक्र करते हुए लिखा कि जब उसने फर्जी सर्टिफिकेट देने से साफ इनकार किया, तो सांसद के दोनों सहायकों ने उसे फोन पर सांसद से बात करने के लिए मजबूर किया। बातचीत के दौरान सांसद ने उसे अप्रत्यक्ष रूप से धमकी दी और चुप रहने का इशारा किया।

ये भी पढ़ेंः महाराष्ट्रः आत्महत्या करने वाली डॉक्टर से रेप का आरोपी पुलिसकर्मी गिरफ्तार

‘सुबह छह बजे तक पोस्टमार्टम नहीं हुआ

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टर के परिवार का कहना है कि मौत के बाद पूरी प्रक्रिया में भारी लापरवाही हुई है। मृतका के भाई ने कहा, “सुबह छह बजे तक कोई पोस्टमार्टम नहीं हुआ। शव को हमारे बिना घर से अस्पताल ले जाया गया। ये सब परिवार की मौजूदगी में होना चाहिए था।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मृत डॉक्टर को गलत पोस्टमार्टम रिपोर्ट और झूठे फिटनेस सर्टिफिकेट बनाने के लिए दबाव डाला जा रहा था। भाई ने आरोप लगाया कि वह पिछले एक साल से पुलिस और राजनीतिक दबाव में थीं। अस्पताल के कुछ कर्मचारी भी इसमें शामिल थे। उन्हें लगातार अतिरिक्त पोस्टमार्टम करने के लिए मजबूर किया जा रहा था।

मृतका के भाई ने यह भी कहा कि डॉक्टर ने पहले कई शिकायत पत्र लिखे थे, इसलिए यह संभव है कि एक और सुसाइड नोट मौजूद हो। उन्होंने कहा कि उन्होंने चार पन्नों के पत्र लिखे थे। ऐसा नहीं हो सकता कि उन्होंने सिर्फ हथेली पर एक छोटा सा नोट लिखकर जान दे दी हो।

पुलिस ने क्या बताया?

इधर, पुलिस ने डॉक्टर पर ही आरोप लगा दिया है। वरिष्ठ अधिकारियों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर रात में गिरफ्तारी से पहले की मेडिकल जाँच करने में आनाकानी करती थीं और अस्पताल लाए गए अभियुक्तों के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने में सहयोग नहीं करती थीं।

पुलिस ने दावा किया कि वह “पर्याप्त आधार के बिना” ही अभियुक्तों को ‘अनफिट’ घोषित कर देती थीं, जिससे उनकी गिरफ़्तारी और हिरासत में देरी होती थी। उन्होंने हर समय मेडिकल औपचारिकताओं के लिए उपलब्ध रहने से भी इनकार कर दिया था, जिसके बाद पुलिस ने उनके स्थान पर किसी और को नियुक्त करने की मांग की थी।

डॉक्टर ने इसी साल जून में सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर (SDPO) को एक शिकायत दी थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उन पर फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने का दबाव डाला जा रहा है। उस पत्र में भी सब इंस्पेक्टर गोपाल बदने का नाम शामिल था। शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद डॉक्टर ने 13 अगस्त को आरटीआई के तहत जानकारी मांगी थी कि उनके पत्र पर क्या कदम उठाए गए।

गौरतलब है कि घटना के बाद से ही फरार चल रहे गोपाल बदने ने रविवार खुद फलटण पुलिस थाने में सरेंडर किया, जिसके बाद उसे हिरासत में लिया गया। बढ़ते दबाव के बीच पुलिस विभाग ने आरोपी इंस्पेक्टर को पहले ही सस्पेंड कर दिया था। अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायालय ने उसे 30 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी में भेजा दिया है।

इस केस में एक और आरोपी प्रशांत को भी पुलिस ने पहले (25 अक्टूबर) ही गिरफ्तार कर लिया है। प्रशांत पर मृतक डॉक्टर को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और आगे की जांच के लिए सबूत जुटाए जा रहे हैं।

BJP नेताओं को क्लीन चिट

इस बीच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने इस मामले में पूर्व भाजपा सांसद रणजीतसिंह नाईक निंबालकर और विधायक सचिन पाटिल को क्लीन चिट दे दी है। निंबालकर का नाम तब सामने आया जब शिवसेना (यूबीटी) नेता अंबादास दानवे ने मृत डॉक्टर का एक पुराना पत्र साझा किया, जिसमें उन पर फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कराने के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया गया था।

दानवे ने कहा, “क्या मुख्यमंत्री अब खुद जांच अधिकारी हैं? जब तक पुलिस रिपोर्ट नहीं आती, तब तक वे कैसे कह सकते हैं कि कोई निर्दोष है?”

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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