शुक्रवार, मार्च 20, 2026
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मेटफॉर्मिन, पैरासिटामोल सहित 49 दवाएं गुणवत्ता परीक्षण में फेल, 4 नकली

नई दिल्लीः भारत के केंद्रीय औषधि नियामक ने सितंबर की मासिक रिपोर्ट में 49 दवाओं को मानक से कम और चार दवाओं को नकली पाया है। इस सूची में शेल्कल 500 (कैल्शियम सप्लीमेंट), पैन डी और पैरासिटामोल जैसी आम दवाएं भी शामिल हैं, जो व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं। यह दवाएं, जिनमें कैल्शियम और विटामिन डी3 सप्लीमेंट्स, ऑक्सीटोसिन, मेट्रोनिडाजोल और फ्लुकोनाजोल शामिल हैं, गुणवत्ता के मापदंडों पर खरी नहीं उतर सकीं।

यह परीक्षण केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा एक नियमित प्रक्रिया के तहत किया गया है, जिसमें हर महीने बाजार में उपलब्ध दवाओं के नमूने एकत्र कर जांचे जाते हैं। डीसीजीआई (औषधि महानियंत्रक) राजीव सिंह रघुवंशी ने बताया कि यह नियमित परीक्षण उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता की दवाएं सुनिश्चित कराने के लिए किए जाते हैं।

रघुवंशी ने बताया, “लगभग 3,000 नमूनों में से 49 दवाओं को वापस मंगवाया गया है, जिनका प्रतिशत लगभग 1.5% है। संगठन के सतर्क निरीक्षण और निगरानी ने दवाओं की गुणवत्ता में कमी को नियंत्रित करने में मदद की है।”

नकली और घटिया गुणवत्ता की दवाओं की सूची में प्रमुख कंपनियों के उत्पाद भी शामिल

सितंबर की सूची में एल्केम हेल्थ साइंस, अरिस्टो फार्मास्यूटिकल्स, कैमिला फार्मास्यूटिकल्स, इनोवा कैप्टन, हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स और इप्का लेबोरेटरीज जैसी प्रमुख कंपनियों के उत्पाद भी शामिल हैं, जिनमें से कुछ विशेष बैच मानक गुणवत्ता पर खरे नहीं उतरे। उदाहरण के तौर पर, पेरासिटामोल और Pan D का एक विशेष बैच NSQ के तहत पाया गया है। यह विशेष रूप से जांच का हिस्सा बनता है ताकि किसी एक बैच में ही समस्या को पहचाना और नियंत्रित किया जा सके।

पहले भी 50 से अधिक दवाएं मानक के अनुरूप नहीं पायी गई थीं

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने अगस्त में भी अपनी रिपोर्ट में 50 से अधिक दवाओं को मानक से कम पाया था, जिसमें पैरासिटामोल, Pan D, कैल्शियम और विटामिन D3 सप्लीमेंट और डायबिटीज की दवाएं शामिल थीं। हर महीने की ये रिपोर्ट उपभोक्ताओं को सतर्क रखने के लिए होती है ताकि वे ऐसे विशेष बैच से बच सकें जो खराब गुणवत्ता के पाए गए हैं।

गुणवत्ता परीक्षण में फेल दवाएं तीन मुख्य श्रेणियों में आती हैं:

1. नकली दवाएं: यह प्रसिद्ध ब्रांड्स की नकल होती हैं, जिनमें सक्रिय तत्व हो भी सकते हैं और नहीं भी। उदाहरण के लिए, ग्लेनमार्क की टेल्मिसार्टन और सनफार्मा की पैंटोप्राजोल नकली पाई गईं और असल कंपनी द्वारा निर्मित नहीं थीं।

2. मानक से कम गुणवत्ता (NSQ) की दवाएं: ये दवाएं घटिया विवरण, सही से न घुलना, या सक्रिय तत्वों की मात्रा कम होने जैसे कारणों से फेल होती हैं। ये दवाएं सीधे तौर पर नुकसान नहीं करतीं, परंतु अपने कार्य में अक्षम हो सकती हैं।

3. मिलावट वाली दवाएं: इन दवाओं में दूषित पदार्थ मिलाए गए होते हैं जो सीधा नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसी दवाएं आमतौर पर वापस मंगा ली जाती हैं।

क्या इन दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए?

ये मासिक अलर्ट घबराहट के लिए नहीं होते।  केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन द्वारा सूचीबद्ध विशेष बैच से ही बचने की सलाह दी जाती है। साथ ही, संबंधित कंपनियों को भी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए जाते हैं। दवा की पैकेजिंग पर छपे बैच नंबर को CDSCO की जारी की गई सूची से मिलाएं। यदि आपके पास उसी बैच की दवा है जिसे असंगत पाया गया है, तो आप इसे उपयोग न करें।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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