संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर पाकिस्तान के दावों को सिरे से खारिज करते हुए साफ कहा कि इस सैन्य कार्रवाई को रोकने की गुहार खुद पाकिस्तानी सेना ने लगाई थी। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने परिषद को याद दिलाया कि पाकिस्तान के किसी बाहरी हस्तक्षेप के दावे पूरी तरह निराधार हैं और भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
सोमवार को सुरक्षा परिषद में बोलते हुए हरीश ने कहा कि हम अपने नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जो भी जरूरी होगा, करेंगे। उन्होंने दोहराया कि आतंकवाद को किसी भी सूरत में सामान्य नहीं बनाया जा सकता, जैसा कि पाकिस्तान करने की कोशिश करता है।
‘पाकिस्तान ने लड़ाई रोकने के लिए गुहार लगाई’
हरीश ने बताया कि 9 मई तक पाकिस्तान भारत पर और हमलों की धमकी दे रहा था, लेकिन 10 मई को हालात पूरी तरह बदल गए। उन्होंने कहा, ’10 मई को पाकिस्तानी सेना ने सीधे हमारी सेना से संपर्क किया और लड़ाई रोकने की गुहार लगाई।’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारतीय कार्रवाई से पाकिस्तान के कई एयरबेस बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए, जिनमें रनवे तबाह हुए और हैंगर जलकर खाक हो गए। इसकी तस्वीरें सार्वजनिक डोमेन में मौजूद हैं।
भारत ने स्पष्ट किया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के आतंकवाद के खिलाफ रुख के अनुरूप था। हरीश ने कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम में पाकिस्तान-समर्थित आतंकियों द्वारा पर्यटकों पर किए गए हमले, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी, उसके बाद भारत ने संतुलित, जिम्मेदार और गैर-उत्तेजक प्रतिक्रिया दी। इस हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट ने ली थी, जो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा संगठन है और जिसे भारत तथा अमेरिका आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का मकसद आतंकियों के ढांचे को ध्वस्त करना और आतंकवाद की क्षमता को खत्म करना था। यह कार्रवाई किसी तरह की उकसावे वाली नहीं थी, बल्कि न्याय सुनिश्चित करने और दोषियों को जवाबदेह ठहराने की दिशा में उठाया गया जरूरी कदम था।
हालांकि हरीश ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके उस दावे का खंडन जरूर किया, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने अपनी कूटनीति और टैरिफ की धमकियों से भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रुकवाया।
पाकिस्तान ने क्या कहा?
बता दें कि सुरक्षा परिषद की खुली बहस के दौरान पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने ऑपरेशन सिंदूर को बिना उकसावे की सैन्य कार्रवाई बताया और कश्मीर तथा सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया। इस पर कड़ा जवाब देते हुए हरीश ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।
सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने पर भारत का पक्ष रखते हुए उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले के बाद भारत को यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद और हर तरह के आतंकी समर्थन को विश्वसनीय और स्थायी रूप से खत्म नहीं करता, तब तक यह संधि स्थगित रहेगी।
हरीश ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र जैसे पवित्र मंच का इस्तेमाल पाकिस्तान द्वारा बार-बार आतंकवाद को वैध ठहराने के लिए नहीं किया जा सकता। उन्होंने पाकिस्तान को आत्ममंथन की सलाह देते हुए कहा कि उसे पहले यह देखना चाहिए कि उसकी सेना ने 27वें संविधान संशोधन के जरिए किस तरह लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर सैन्य प्रभुत्व स्थापित किया है और सेना प्रमुख को आजीवन संरक्षण दिया है।

